राजस्थान से बरामद प्रमाणपत्र
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मानव भारती विवि में डिग्री हासिल करने के लिए आवेदन करने वालों को न नहीं कहा जाता था। डिग्री के एवज में उनसे मोटी रकम ली जाती थी। न सिर्फ विवि, बल्कि उनसे संबद्धता प्राप्त संस्थान भी डिग्री जारी कर देते थे। डिग्री के बाद छात्रों को प्रमाण जारी किया जाता था। हिदायत दी जाती थी कि छात्रों को डिग्री सत्यापित करने के लिए विवि कैंपस जाना होगा। जैसे ही छात्र विवि कैंपस पहुंचते थे, रिसेप्शन पर उनसे तीन हजार रुपये की फीस ली जाती थी।
इसके एवज में रसीद जारी नहीं होती थी। इस फीस के बाद डिग्री को सत्यापित कर दिया जाता था। कोई भी छात्र जब इस डिग्री के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करता था तो दोबारा डिग्री सत्यापित करने को कहा जाता था। कैंपस में फिर तीन हजार की वसूली पर डिग्री सत्यापित हो जाती थी। मनोविज्ञान में एमए करने वाली हरियाणा की पीड़ित के मामले में जब सरकारी तौर पर डिग्री को सत्यापित करने के लिए भेजा तो विवि इससे मुकर गया। विवि प्रबंधन ने खुद ही इसे फर्जी करार दे दिया।
युवाओं की नौकरियों पर संकट
मानव भारती विवि से लाखों डिग्रियां जारी होने का खुलासा हुआ है। इनके आधार पर कई युवा नौकरी भी कर रहे हैं। जांच का दायरा बढ़ने के बाद उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। सरकारी तौर पर की गई पड़ताल में मानव भारती की डिग्री फर्जी होने का खुलासा हुआ है। कई युवा इन डिग्रियों के आधार पर निजी संस्थानों में भी नौकरी कर रहे हैं। उनके लिए भी फर्जीवाड़ा खतरे की घंटी बजा रहा है।