रामपुर डाक मंडल के अधीक्षक जोगिंदर सिंह चौधरी ने सीबीआई को शिकायत भेजी थी। जांच सीबीआई के निरीक्षक रविंद्र कुमार को सौंपी गई। सीबीआई अब फर्जी प्रमाणपत्रों, संभावित रैकेट और इसमें शामिल अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की जांच करेगी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। एफआईआर के अनुसार बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुरसंड निवासी सुजीत कुमार ने ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में 10वीं की फर्जी मार्क्सशीट प्रस्तुत की। उसने तमिलनाडु राज्य स्कूल परीक्षा बोर्ड द्वारा 10 जून 2017 को जारी दर्शाया गया प्रमाणपत्र संलग्न किया था। इसी कथित फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर उसे 14 अगस्त 2021 को किन्नौर स्थित नामगिया शाखा डाकघर में शाखा डाकपाल नियुक्त किया गया।
डाक विभाग ने सुजीत के प्रमाणपत्र का सत्यापन तमिलनाडु के सरकारी परीक्षा निदेशालय, चेन्नई से कराया। तमिलनाडु के राज्य स्कूल परीक्षा बोर्ड के संयुक्त निदेशक (कार्मिक) ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि यह प्रमाणपत्र उनके रिकॉर्ड में नहीं है। विभाग ने इसे कभी जारी नहीं किया था। इससे पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। सुजीत 14 अगस्त 2021 से 19 मई 2022 तक इस पद पर कार्यरत रहा। इस अवधि में उसने सरकारी खजाने से 1,31,038 रुपये वेतन और भत्तों के रूप में प्राप्त किए। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद डाक विभाग ने 19 मई 2022 को ज्ञापन जारी कर उसकी सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गईं।
दर्ज एफआईआर में सुजीत के साथ कई अज्ञात सरकारी कर्मचारी और निजी व्यक्ति भी सह-आरोपी हैं। शुरुआती जांच में एजेंसी को एक संगठित सिंडिकेट या रैकेट का संदेह है। यह रैकेट पैसों के बदले जाली दस्तावेज से सरकारी नौकरियां दिलाता है। सीबीआई के पुलिस अधीक्षक राजेश चहल के अनुसार जांच जारी है। जांच के दौरान फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने लाई जाएगी।