मनीषा का आरोप था कि यह रजिस्ट्री गलत तरीके से की गई है और हिमांक ने इसकी वसीयत भी अपने नाम फर्जी तरीके से करवाई है। माना जा रहा है कि यह भी एक वजह है कि भाई और बहन के बीच चल रहे संपत्ति विवाद में गोविंद की एंट्री हुई। इसके बाद ही मनीषा की हत्या को लेकर आरोपियों ने साजिश रची। हिमांक ने सरस्वती पैराडाइज स्कूल संजौली के सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस गोविंद को दिया और 8.50 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर की। इसके बाद गोविंद ने सीसीटीवी का एक्सेस आगे दोनों शूटरों को उपलब्ध करवाया।
हत्या की वारदात को अंजाम देने से पहले शिमला आकर बाकायदा रेकी की गई। गोविंद ने दोनों शूटरों को किराये पर गाड़ी हायर करवाकर दी। इसके अलावा फर्जी नंबर प्लेट, मोबाइल और खर्च के लिए 50 हजार रुपये भी दिए। साजिश के तहत 13 जून को शाम 6:00 बजे के करीब दीपक और आशीष ने मनीषा को स्कूल गेट के पास गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया। गौरतलब है कि शहर में हुई यह हत्या की वारदात काफी चर्चित रही है। लोगों का कहना है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि शहर की शांति बरकार रहे। बाहरी लोगों की वजह से शहर में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।
एसएसपी गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस ने इस हत्याकांड की वजह संपत्ति विवाद थी। पुलिस ने मामले में संलिप्त सभी आरोपियों को गिरफ्तार करके कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस की टीमों ने पेशेवर ढंग से काम करके इस ब्लाइंड मर्डर केस को काफी कम समय में सुलझाने में कामयाबी हासिल की है।