राजधानी की ज्यादातर बसों में किराया वसूलने के बाद सवारियों को नहीं दिए जा रहे टिकट
शहर में निजी बसों में हजारों यात्री करते हैं सफर, इक्का-दुक्का बसों को छोड़ नियमों की उड़ रहीं धज्जियां
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला की सड़कों पर दौड़ने वाली निजी बसों में यात्रियों को नियमों को ताक पर रखकर टिकट नहीं दिया जा रह है। अगर कोई यात्री टिकट मांगे तो कंडक्टर उसके साथ बदसलूकी पर उतर आते हैं। इसी तरह का मामला शनिवार रात को पेश आया, जब संजौली से पुराना बस स्टैंड आने वाली निजी बस में अंकेश नाम के यात्री ने कंडक्टर से टिकट मांगी तो जवाब मिला कि टिकट नहीं मिलेगी और बस से उतर जाओ। इसी तरह से शहर की ज्यादातर बसों में टिकट मांगने पर यात्रियों के साथ इसी तरह से बदसलूकी जाती है। यात्री ने इस बारे में आरटीओ शिमला को फोन के माध्यम से शिकायत की है। उन्होंने नियमों की अवहेलना करने वाले निजी बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का कहना है जब राजधानी में ही निजी बस संचालक नियमों को मानने से इन्कार कर रहे हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में कैसी व्यवस्था होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। हैरानी इस बात की है कि राजधानी शिमला की सड़कों पर ही दौड़ने वाली निजी बसों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ज्यादातर बसों में यात्रियों को किराये के बदले टिकट नहीं दिया जाता है। परिवहन विभाग की ओर से बसों की चेकिंग करने पर कार्रवाई से बचने के लिए एक-दो दिन बसों में टिकट देने की व्यवस्था चलती है और इसके बाद फिर से वहीं स्थिति बन जाती है। शहर में 106 के करीब निजी बसों का संचालन होता है, जिसमें हजारों यात्री रोज सफर करते हैं। आरटीओ शिमला विश्व मोहन देव चौहान ने बताया कि नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।