प्रदेश में स्थित चार मेडिकल कॉलेजों में भी आईजीएमसी और टांडा की तर्ज पर फैकल्टी का अलग से काडर बनाया जाएगा। एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसरों की एक बार किसी मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति होने के बाद अन्य कॉलेजों में बदली नहीं होगी। नाहन, चंबा, नेरचौक और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की स्थायी नियुक्ति के लिए सरकार ने यह नई नीति बनाई है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसकी अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित कर दी है।प्रदेश सरकार ने नए खोले गए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की नियुक्ति के लिए आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में नियुक्त एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसरों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन करने वालों को मेडिकल कॉलेज में समायोजित करने के बाद पदोन्नति दी जाएगी।