देवभूमि हिमाचल के बाशिंदे ही नहीं, अब देवी-देवता भी सोशल साइट खासकर फेसबुक पर आ गए हैं। देवताओं के नाम पर स्पेशल अकाउंट बनाए गए हैं। इसमें देवताओं के फोटो, इतिहास, कहां है मूल स्थान, कैसे पहुंचें, क्या है महत्ता आदि महत्वपूर्ण जानकारी डाली गई है। फेसबुक यूजर देवताओं को धड़ाधड़ लाइक दे रहे हैं।
कुल्लू दशहरा इंटरनेशनल फेस्टिवल के नाम से बने फेसबुक अकाउंट में दशहरा उत्सव में होने वाले कार्यक्रमों की हर जानकारी उपलब्ध है। अब तक 4467 लोगों ने इसे लाइक किया है। श्रीखंड महादेव, मणिमहेश यात्रा को लेकर भी कम्यूनिटी लिंक बनाए गए हैं। मां नयना देवी, चिंतपूर्णी शक्तिपीठ के भी फेसबुक पर कम्यूनिटी लिंक हैं।
लाइव आरतियां और ऑनलाइन चढ़ावा
इसके अलावा एक दर्जन से भी अधिक कुल्लू-मंडी और रामपुर के देवी-देवताओं के फेसबुक अकाउंट हैं। देवी-देवता कारदार संघ कुल्लू के अध्यक्ष दोत राम का कहना है कि देवताओं की जितनी अधिक लोगों को जानकारी मिलेगी उतना अच्छा है। इससे शोधार्थियों को फायदा होगा और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देवी-देवता कारदार संघ स्वयं कुल्लू के समस्त देवताओं की जानकारी एक वेबसाइट में डालने जा रहा है।
हिमाचल की शक्तिपीठ ज्वालाजी में सुबह-शाम की आरतियां लाइव देखी जा सकती हैं। इसके अलावा अधिकतर शक्तिपीठों में ऑनलाइन चढ़ावे की सुविधा भी हैं। शिमला के तारादेवी मंदिर, संकटमोचन मंदिर और कालीबाड़ी मंदिर में भी ऑनलाइन चढ़ावे की सुविधा है। जाखू हनुमान मंदिर में शुक्रवार से सुविधा शुरू हो गई।
कई रोचक पहलु भी
कुछ देवताओं के नाम से बने फेसबुक अकाउंट में उनके रहने आदि का भी जिक्र किया गया है। मसलन महादेव के नाम से बने अकाउंट में एबाउट अस के स्थान पर लिखा है हरहर महादेव। जबकि लिव इन में कैलाश तो फ्रॉम में त्रिलोकीनाथ का जिक्र है। इसी तरह विष्णु भगवान के नाम से बने फेसबुक अकाउंट में उनके रहने का स्थान बैकुंठ धाम दिया गया है।
क्या कहती है पुलिस
एसपी बिलासपुर अशोक शर्मा का कहना है कि सोशल नेटवर्किंग साइट का प्रचलन बढ़ गया है। ऐसे अकाउंट से देवी-देवताओं से संबंधित जानकारी लोग सीधे ले सकते हैं। हालांकि, ये सुनिश्चित करना होगा कि इसका दुरुपयोग न हो।