किन्नौर में किसानों को बांट दिया एक्सपायरी तिथि का मटर बीज।
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जिला किन्नौर में इन दिनों मटर की बिजाई का काम शुरू हो गया है, लेकिन कृषि विभाग ने एक्सपायर हो चुके मटर का बीज देकर किसानों को परेशानी में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि गोल्डी मटर का बीज कृषि विभाग की ओर से सब्सिडी पर दिया जा रहा है लेकिन पांच महीने पहले ही एक्सपायर हो चुका है। विभाग को दावा है कि एक्सपायर मटर का जो बीज है सोलन में स्थित प्रयोगशाला में जांच करने के बाद भी किसानों को दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मटर बीज को सोलन की प्रयोगशाला में टेस्ट करने के लिए दूसरा लॉट नंबर 15306681 भेजा गया, लेकिन किसानों को 5 महीने पहले एक्सपायर हो चुका गोल्डी मटर का बीज लॉट नो 15306601 किन्नौर के तीनों ब्लॉकों में 500 क्विंटल कृषि विभाग ने किसानों के लिए भेज दिया है।
गाेल्डी मटर बीज जिसकी पैकेजिंग तिथि 25 मार्च 2023 और बीज की टेस्टिंग तिथि 14 मार्च 2023 के साथ वैलडिटी 13 दिसंबर 2023 दर्शाया गया है। किसानों की मांग है कि सरकार उच्च स्तरीय समिति बनाकर जांच करवाए। गोल्डी मटर का बीज किन्नौर के कल्पा ब्लॉक में 170 क्विंटल, पूह ब्लॉक में 250 क्विंटल और निचार ब्लॉक में 80 क्विंटल किसानों को 85 रुपये किलो के हिसाब से भेजा गया है। प्रदेश सरकार की ओर से किसानों को 40 रुपये सब्सिडी पर दिया जा रहा है जबकि उसकी कीमत 125 रुपये है। दूसरी तरफ कृषि विभाग किन्नौर की ओर से हिमपाल्म मटर का बिज कल्पा ब्लॉक को 120 क्विंटल, पूह ब्लॉक को 500 क्विंटल और निचार ब्लॉक को 80 क्विंटल 55 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भेजा जा रहा है, जबकि हिमपाल्म मटर बीज की कीमत 95 रुपये प्रति किलो है, जिसमें सरकार की ओर से 40 रुपये सब्सिडी दी जा रही है।
वही कृषि विभाग किन्नौर ने मटर का बीज गोल्डी लोट नंबर 15306681 को सरकारी प्रयोगशाला चंबाघाट जिला सोलन को प्रमाणित करने के लिए भेजा था, जबकि किन्नौर के किसानों को गोल्डी मटर बीज लॉट नंबर 15306601 दिया जा रहा है वह टेस्टिंग बीज के लोट नंबर से अलग दिया गया है। इससे जिले के किसान स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। छितकुल के किसान अरविंद नेगी, भाग सिंह, जोहर लाल नेगी, केहर सिंह नेगी और शंकर भगत नेगी ने सरकार से जांच करवाने की मांग की है। उधर, कृषि विभाग के अधिकारी ओम प्रकाश बंसल ने कहा कि जांच की जाएगी। गोल्डी मटर बीज का 5 महीने पहले 23 दिसंबर 2023 को एक्सपायरी डेट का होने का संज्ञान लिया था उसके बाद बीज की उपयोगिता जांचने के लिए चंबाघाट प्रयोगशाला भेजा गया था।
गोल्डी मटर बीज रिपोर्ट में
सही पाया गया था। उसके बाद किसानों को बेचा गया। एक्सपायर होने से बीज से किसानों को परेशानी नहीं होगी।