बर्फबारी के बाद सेब पेड़ों के लिए चिलिंग ऑवर्स पूरे हो गए हैं। 6800 से 7200 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब पेड़ों लिए 15 सौ घंटे तक कड़ाके की ठंड जरूरी रहती है। यह वर्तमान समय तक पूरी हो चुकी है। दिसंबर और जनवरी में हुई बर्फबारी को सेब की आगामी फसल के लिए बागवान शुभ मान रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञों ने मौसम साफ होते ही बागवानों को बगीचों के प्रबंधन में जुटने की सलाह दी है।
सेब पेड़ों को अगर 1800 घंटे से ज्यादा समय तक कड़ाके की ठंड मिलती है तो इससे सेब सीजन में विलंब होता है। बागवानों का कहना है कि जिस साल भी 1800 से ज्यादा घंटे तक सेब के पेड़ों को ठंड मिलती है तो इससे पेड़ों में फूल देरी से आते हैं। सेब पेड़ों में फलों की सेटिंग में भी देर से होती है। सेब के पेड़ों के लिए 1400 से 1800 घंटे तक ठंड अच्छी मानी जाती है। ऐसी स्थिति में सेब के पेड़ों में एक साथ फूल खिलते हैं।
अगर पेड़ों में 70 फीसदी तक फूल एक साथ आ जाएं तो इससे सेब की फसल अच्छी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेब के पेड़ों में फूल 8 से 20 अप्रैल तक आते हैं तो फलों की सेटिंग अच्छी होती है। इसके बाद 20 से 25 अप्रैल तक सेब के पेड़ों में फूल आते हैं तो इसे विलंब माना जाता है। ऐसी स्थिति में सेब के सीजन में देरी होती है और बागवानों को फसल के लिए इंतजार करना पड़ा है।
क्या कहते हैं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. विजय ठाकुर
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. विजय ठाकुर कहते हैं कि सेब पेड़ों के लिए 1500 से 1800 घंटे तक ठंड अच्छी मानी जाती है। 1800 से अधिक घंटे तक ठंड रहती है तो इससे सेब के सीजन में देरी होती है। अप्रैल में 8 से 20 तक सेब के पेड़ों में एक साथ फूल आते हैं तो इससे फसल भी अच्छी होगी।