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उम्मीदों का बजट: अस्पताल की गाड़ी जाए घर, निशुल्क हो मरीजों का उपचार

Fri, 09 Feb 2024 10:56 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए स्वास्थ्य अधिकारियों में खूब माथापच्ची चल रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू की स्वयं स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं। 
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उम्मीदों का बजट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू 17 फरवरी को वार्षिक बजट पेश करने जा रहे हैं। इस बजट से जनता को कई उम्मीदें हैं। इसी साल लोकसभा चुनाव होने हैं। इसे भी ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए स्वास्थ्य अधिकारियों में खूब माथापच्ची चल रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू की स्वयं स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं। मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों के अस्पतालों में न जाना पड़े, इसको लेकर भी स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचा विकसित किए जाने पर जोर रहने की संभावना है।

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कांग्रेस ने हिमाचल की जनता को 10 गारंटियां दी हैं। आठवीं गारंटी में ‘अस्पताल की गाड़ी आएगी गांव, लोगों को मुफ्त दवा और इलाज मुफ्त होगा’ इसको भी बजट में शामिल करने की पहल की जा सकती है। हिमाचल प्रदेश में एंबुलेंस का दायरा बढ़ाए जाने पर भी राज्य सरकार को सुझाव मिले हैं। लोगों ने गंभीर बीमारी से ग्रस्त बुजुर्ग के इलाज के लिए डॉक्टरों को स्वास्थ्य किट के साथ घर भेजने की बात कही है। आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज के अलावा अन्य चारों मेडिकल कॉलेजों में रोबेटिक सर्जरी होगी।

नए नर्सिंग कॉलेज खोलने को मंजूरी देने के साथ-साथ आपात विभाग में विशेषज्ञ रोटेशन में सेवाएं देंगे। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में कैंसर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोला जाना है। इस विषय पर मुख्यमंत्री केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिल चुके हैं। आदर्श अस्पतालों में छह विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी। इसके लिए सरकार पांच सौ डॉक्टरों, चार हजार नर्सों और तीन हजार फार्मासिस्टों की भर्ती की घोषणा कर सकती है। स्वास्थ्य केंद्रों में भी विशेषज्ञ डाॅक्टरों को मरीजों के उपचार के लिए लगाया जा सकता है। हर अस्पताल में एमआरआई और सिटी स्कैन की सुविधा मुहैया कराए जाने पर भी अधिकारियों और जनता की भी राय मांगी गई है।

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मेडिकल कालेजों में आधारभूत ढांचा विकसित करने की जरूरत : वर्मा
स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष एमआर वर्मा ने कहा कि हिमाचल में लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्पेशलिस्ट डाक्टरों की भर्ती होनी चाहिए। आईजीएमसी और टांडा के अलावा हिमाचल में चार नए मेडिकल कालेज और चम्याणा सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल हैं। इनमें अब आधारभूत ढांचा विकसित किए जाने की जरूरत है।
 

एक छत के नीचे सभी चिकित्सा सुविधाएं हों उपलब्ध : डॉ. पॉल
इंदिरा गांधी मेडिकल काॅलेज सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. सुरेंद्र पॉल ने कहा कि अस्पतालों में मरीजों को एक छत के नीचे सभी चिकित्सा सुविधा मुहैया होनी चाहिए, ताकि मरीज भटकें नहीं। अस्पतालों में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। मरीज के तीमारदारों को गाडी खड़ी करने की लिए पार्किंग नहीं मिल पाती। आईजीएमसी और चम्याणा अस्पताल के बीच मरीजों की सुविधा के लिए तालमेल बैठना होगा। मरीजों को सभी सुविधा अस्पतालों में मिले ताकि उन्हें पीजीआई व एम्स जाने की जरूरत न पड़े।
 

स्वास्य्य के क्षेत्र में बजट से उम्मीदें
- मरीजों को निशुल्क दवाइयां व अस्पताल में निशुल्क उपचार हो।
- पीजीआई और एम्म की तर्ज पर मेडिकल कालेजों में मिले चिकित्सा सुविधा।
- स्पेशलिस्ट डाक्टरों की तैनाती हो।
- बड़े ऑपरेशन करने के लिए महीने में एक बाहर बाहरी राज्यों से डॉक्टर बुलाए जाएं।
- टेलीमेडिसन चिकित्सा सुविधा को मजबूत करने की जरूरत।
-आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज के अलावा अन्य मेडिकल कालेजों में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मिले
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ओपीएस न मिलने और भर्ती एवं पदोन्नति प्रक्रिया बंद होने से बिजली कर्मचारी खफा
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ ने ओपीएस बहाल न होने और भर्ती एवं पदोन्नति प्रक्रिया ठप होने पर नाराजगी जताई है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण कापटा ने एक प्रेस बयान के माध्यम से कहा कि प्रदेश में भारी बर्फबारी की वजह से बाधित हुई विद्युत व्यवस्था को पुनः पटरी पर लाने के लिए प्रदेश भर के विद्युत कर्मचारी फील्ड एवं तकनीकी कर्मचारियों की कमी के बावजूद दिन रात कार्य कर रहे हैं। उन्होंने फील्ड एवं तकनीकी कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि कार्य के साथ-साथ अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें और सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करें। लक्ष्मण कापटा ने कहा है कि सरकार और विद्युत प्रबंधन वर्ग भी फील्ड एवं तकनीकी कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा का लोहा मानती है। परंतु यह बड़े खेद का विषय है कि विगत एक वर्ष से बिजली बोर्ड के लगभग 6500 कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाली से महरूम रखा गया है और यह मामला अधर में लटका पड़ा है।
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