कई बार हिमाचल आ चुकीं सुनीता ने इस बार सरकार के अधिकारियों से शिकायत की कि पहली बार उन्हें सड़क किनारे कई जगह बड़ी संख्या में प्लास्टिक कचरा दिखा। कहा कि हिमाचल एक मॉडल स्टेट है, ऐसे में प्लास्टिक पर सख्ती से काम करने की जरूरत है।
हमारा पीने का 80 फीसदी पानी बर्बाद होता है, ऐसे में उसे रीसाइकिल कर दोबारा इस्तेमाल करने के लिए प्रयास करने चाहिए। विकास से ज्यादा पानी बचाने और उसे स्टोर करने के लिए जमीन की जरूरत है। ऐसे में हर घर में वर्षा जल संचयन तंत्र होना जरूरी है।
सुनीता ने कहा कि जंगल की आग की सबसे बड़ी वजह गलत वन प्रबंधन है। हमें आज पेड़ों को काटने और उनकी जगह नए पौधे लगाने की निरंतर प्रक्रिया वाली नीति अपनानी चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को आजीविका मिले और जंगलों का भी बेहतर प्रबंधन हो सके। कहा कि आज गर्मी बढ़ रही है और नमी कम हो रही है। इसकी वजह से जंगल जलने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
अपने वक्तव्य के दौरान नारायण के शिमला के जल संकट को मैनहेटन के जल संकट से जोड़ने पर डिप्टी मेयर राकेश शर्मा ने आपत्ति जताई। हालांकि, सुनीता ने उनके तर्कों पर कहा कि पानी का संकट इसलिए नहीं है कि पानी नहीं है बल्कि उसके प्रबंधन की वजह से दिक्कत रही जिससे वह इंकार नहीं कर सकते। कहा कि पानी के दोबारा इस्तेमाल के लिए नीति बनाने की सख्त जरूरत है।
पर्यावरणविद व पद्मश्री कार्तिकेय साराभाई ने कहा कि हमें देश दुनिया में जो भी बेहतर हो चुका है उससे सीख लेते हुए बेहतरीन चीजों को देश में लागू करना चाहिए। कहा कि हम आज गलती कर उसे सुधारने के लिए काम कर रहे हैं।
अब समय है कि दूसरों की गलतियों से सीख लेकर सीधे सही किया जाए क्योंकि गलती को सुधारने वाला विकास बेहद खर्चीला है और जलवायु के लिहाज से भी बेहद नुकसानदेह है। जीआईजेड से आशीष चतुर्वेदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की इस चुनौती को स्वीकार कर उसके लिए तैयार रहने की जरूरत है।