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न सुधरे तो इस शहर के जैसा हो जाएगा शिमला का हाल

Wed, 01 Aug 2018 06:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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दुनिया के सबसे बेहतरीन, आधुनिक और महंगे जल वितरण प्रबंधन वाले मैनहेटन को आज भीषण जल संकट से गुजरना पड़ रहा है। शिमला को भी सीख लेने की जरूरत है कि महंगे जल वितरण तंत्र के बजाय मौजूद पानी के रीयूज को लेकर ठोस काम करें वर्ना शिमला को भी मैनहेटन जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है। पद्मश्री व महानिदेशक राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सुनीत नारायण ने बुधवार को शिमला में वी 4 क्लाइमेट के तहत आयोजित लेक्चर सीरीज के दौरान कही।

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उन्होंने कहा कि हम आज दूर से पानी लाने के लिए योजनाएं बना रहे हैं लेकिन जो पानी इस्तेमाल के नाम पर बर्बाद हो रहा उसे रीसाइकिल कर दोबारा इस्तेमाल करने पर सोच ही नहीं रहे। कहा कि यह कहना गलत है कि जलवायु परिवर्तन का असर भविष्य में होगा बल्कि उसका असर अभी से दिखना शुरू हो गया है। आज सूखे के मौसम में भीषण बारिश और बारिश के मौसम में सूखा पड़ रहा है।

परिवर्तन के असर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी में गर्म हवाओं की वजह से इस साल उठी धूल भरी आंधियों ने सैकड़ों जानें ले लीं। उन्होंने केरल के नॉट इन माय बैकयार्ड अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों को खुद अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कूड़े को अलग कर दोबारा इस्तेमाल होने वाले सामान को कबाड़ी को और बाकी सामान को कंपोस्ट बनाने पर काम करना होगा।
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इससे पहले कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्रीकांत बाल्दी, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण तरुण कपूर, निदेशक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी डीसी राणा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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डिप्टी मेयर को लगा बुरा, पर नहीं दे सके जवाब

कई बार हिमाचल आ चुकीं सुनीता ने इस बार सरकार के अधिकारियों से शिकायत की कि पहली बार उन्हें सड़क किनारे कई जगह बड़ी संख्या में प्लास्टिक कचरा दिखा। कहा कि हिमाचल एक मॉडल स्टेट है, ऐसे में प्लास्टिक पर सख्ती से काम करने की जरूरत है।

हमारा पीने का 80 फीसदी पानी बर्बाद होता है, ऐसे में उसे रीसाइकिल कर दोबारा इस्तेमाल करने के लिए प्रयास करने चाहिए। विकास से ज्यादा पानी बचाने और उसे स्टोर करने के लिए जमीन की जरूरत है। ऐसे में हर घर में वर्षा जल संचयन तंत्र होना जरूरी है।

सुनीता ने कहा कि जंगल की आग की सबसे बड़ी वजह गलत वन प्रबंधन है। हमें आज पेड़ों को काटने और उनकी जगह नए पौधे लगाने की निरंतर प्रक्रिया वाली नीति अपनानी चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को आजीविका मिले और जंगलों का भी बेहतर प्रबंधन हो सके। कहा कि आज गर्मी बढ़ रही है और नमी कम हो रही है। इसकी वजह से जंगल जलने की घटनाएं बढ़ रही हैं।

अपने वक्तव्य के दौरान नारायण के शिमला के जल संकट को मैनहेटन के जल संकट से जोड़ने पर डिप्टी मेयर राकेश शर्मा ने आपत्ति जताई। हालांकि, सुनीता ने उनके तर्कों पर कहा कि पानी का संकट इसलिए नहीं है कि पानी नहीं है बल्कि उसके प्रबंधन की वजह से दिक्कत रही जिससे वह इंकार नहीं कर सकते। कहा कि पानी के दोबारा इस्तेमाल के लिए नीति बनाने की सख्त जरूरत है।

पर्यावरणविद व पद्मश्री कार्तिकेय साराभाई ने कहा कि हमें देश दुनिया में जो भी बेहतर हो चुका है उससे सीख लेते हुए बेहतरीन चीजों को देश में लागू करना चाहिए। कहा कि हम आज गलती कर उसे सुधारने के लिए काम कर रहे हैं।

अब समय है कि दूसरों की गलतियों से सीख लेकर सीधे सही किया जाए क्योंकि गलती को सुधारने वाला विकास बेहद खर्चीला है और जलवायु के लिहाज से भी बेहद नुकसानदेह है। जीआईजेड से आशीष चतुर्वेदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की इस चुनौती को स्वीकार कर उसके लिए तैयार रहने की जरूरत है।
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