कुल्लू की पौराणिक काष्ठकुणी कलाकृतियां सात समंदर पार विदेशियों के घरों की शान बढ़ा रही हैं। इजराइल, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड समेत अन्य देशों में कुल्लू की विभिन्न कलाकृतियों की काफी डिमांड है। विदेशों से भेजे जा रहे डिजाइन को भी लकड़ी पर उकेर कर सप्लाई किया जा रहा है।
कुल्लू जिला समेत हिमाचल के अधिकतर मंदिर काष्ठकुणी शैली में बने हैं। देश-विदेश से कुल्लू पहुंच रहे पर्यटक काष्ठकुणी शैली में बने मंदिरों और कलाकृतियों को देख आकर्षित हो रहे हैं। विदेशी सैलानी लकड़ी में काष्ठकुणी शैली में बने डिजाइनों और भगवान की मूर्तियां खरीद रहे हैं।
इंग्लैंड से एक विदेशी व्हाट्सऐप पर डिजाइन भेजकर काष्ठकुणी कलाकृतियां मंगवा रहा है। जिन्हें लोगों के ऑर्डर पर पहुंचाया जा रहा है। विदेशी पर्यटक ड्रैगन, फिश, होम नेम समेत अन्य कई कलाकृतियों को खरीद रहे हैं। हाल ही में स्थानीय कारीगर को इजराइल से
100 बाउल का ऑर्डर मिला है। बाउल को विशेष रूप से तैयार किया गया है। जिसमें काष्ठकुणी कलाकृतियां भी हैं। देवदार, कायल, अखरोट की लकड़ी में कड़ी मेहनत के बाद इन कलाकृतियों का डिजाइन बनाया जाता है। इन कलाकृतियों को देख हर कोई दंग रह जाता है।
2011 से विदेश में कर रहे काष्ठकुणी कलाकृतियां सप्लाई
काष्ठकुणी कलाकृतियां
- फोटो : अमर उजाला
कारीगर धनराज का कहना है कि वह अपने पिता के साथ कार्य करता था। इसके बाद दो वर्ष के लिए काष्ठकुणी कलाकृतियां बनाने का प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2011 से विदेश के लिए काष्ठकुणी कलाकृतियां सप्लाई की जा रही है। विदेश से एक व्यक्ति ऑर्डर बुक करता है।
जिसे कलाकृतियां मुहैया करवाई जाती है। धनराज का कहना है कि विदेशी उन्हें अपने साथ इंग्लैंड ले जाना चाहते हैं लेकिन वह कुल्लू में ही रहकर काम करना चाहते हैं। कुछ युवा कलाकृतियां बनाने के लिए विदेश गए हैं।
काष्ठकुणी कलाकृतियां बनाने के लिए करीब 200 रुपये प्रति वर्ग फीट मजदूरी ली जाती है। छोटे-छोटे फ्रेम बनाने के लिए भी एक सप्ताह का समय लग जाता है। मंदिरों में काष्ठकुणी कलाकृतियों के लिए कई माह लग जाते हैं। इस दौरान मुख्य कारीगर अपने बाल नहीं काटते हैं।
काष्ठकुणी कलाकृतियां पूरी तरह से हाथ से बनाई जाती हैं। ये कलाकृतियां बनाने के लिए विशेष औजार इस्तेमाल किया जाता है। हाथ से बनी होने के कारण इनकी ओर पर्यटक एकदम आकर्षित होते हैं। काष्ठकुणी कलाकृतियां पौराणिक मानी जाती हैं।
सालाना एक करोड़ से अधिक हो रहा कारोबार
काष्ठकुणी कलाकृतियां
- फोटो : अमर उजाला
कुल्लू के सैंज में सालाना विदेश व देशभर में काष्ठकुणी कलाकृतियों का कारोबार करीब एक करोड़ रुपये से अधिक हो रहा है। कसौल व सैंज में विदेश व देशभर से आ रहे पर्यटक स्वयं आकर काष्ठकुणी कलाकृतियों के ऑर्डर बुक करवा रहे हैं।
इनमें मंदिर, ड्रैंगन, फिश, मूर्तियां समेत अन्य मौजूद हैं। इंग्लैंड से माइकल ऑनलाइन बुकिंग करवा कर विदेश में काष्ठकुणी कलाकृतियां मंगवाते हैं। सैंज में कारीगर विक्की ठाकुर, धनराज, जगत राम, सन्नी ठाकुर, डोले राम काष्ठकुणी कलाकृतियां तैयार करते हैं।