अनिल ने कहा कि टिकटों के लिए कांग्रेस हाईकमान को भेजी गई पहली सूची से मेरा नाम तक कटवा दिया गया था। हम किनारे में पडे़ थे, हमें छेड़ना उन्हें उल्टा पड़ा। मुझे इसकी भनक लगी तो कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बात की। सुक्खू ने भी इस पर अपनी मजबूरी जाहिर की।
मंडी में भाजपा ने कांग्रेस को क्लीन स्वीप करते हुए जीत हासिल की तो इस बार मुझे भी पिछली बार की तरह मंत्री बनने को खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी। भाजपा को ज्वाइन करने के सवाल पर अनिल बोले कि मेरा बेटा आश्रय शर्मा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव था। वह मेरी तरह मेरे साथ रचे जा रहे इस सारे षड्यंत्र से वाकिफ था।
उसने पहले नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। शाह से सकारात्मक जवाब मिलने के बाद मुझे सूचित किया। हमने ये बात पंडित जी से भी साझा नहीं की। चुपचाप भाजपा में चले गए। पंडित जी को पता चला तो उनके लिए यह झटके की तरह था।
उन्होंने इसे बेवकूफी कहते हुए कहा कि ये हमने क्या कर लिया है। मगर जब फैसला ले लिया गया था तो फिर उन्होंने पूरा आशीर्वाद दिया। संयोग देखिए, चुनाव भी जीत लिया, मंत्री भी बन गया हूं। अब तो बस जनता के लिए काम करना है।
ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने भाजपा को ज्वाइन कर पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर को अपनी परंपरागत सीट मंडी सदर से हराया है।
अनिल शर्मा के मंत्री रहते पार्टी छोड़ने के बाद कांग्र्रेस ने चंपा ठाकुर को टिकट दिया। अनिल शर्मा पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम के बेटे हैं। वे चौथी बार विधानसभा चुनाव जीते हैं।