चौथी कक्षा में पढ़ते हुए स्कूल में बनाई पेंटिंग अध्यापकों को इतनी पसंद आई कि उन्होंने और पेंटिंग बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। अध्यापकों से प्रोत्साहन पाकर धर्मशाला के शामनगर के मुकेश थापा देश-विदेशों में अपनी चित्रकारी की धाक जमा चुके हैं। अभी तक मुकेश अमरीका में ही करीब 20 पुरस्कार जीत चुके हैं। दाड़ी के एक बाल से पेंटिंग बनाने का उनका रिकार्ड लिम्का बुक में दर्ज है।
इस पेंटिंग के कारण उन्हें भारत सहित चार विभिन्न देशों ने भी पुरस्कृत किया है, जिसमें चीन, इंग्लैंड और नेपाल शामिल हैं। मुकेश थापा का जन्म धर्मशाला के शामनगर में देवमाया थापा व एमएस थापा के घर हुआ था। मुकेश की आरंभिक शिक्षा नर्सरी स्कूल धर्मशाला व ब्वॉयज स्कूल धर्मशाला में हुई। थापा ने उच्च शिक्षा पीजी कालेज धर्मशाला से बीकॉम में प्राप्त की।
चौथी कक्षा से पेंटिंग बनानी शुरू की। इसके लिए किसी से प्रशिक्षण नहीं लिया। मात्र अपनी कल्पना शक्ति के बल वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं। मुकेश थापा ने अपनी कलाकारी की जादूगरी से दाढ़ी के बाल से पोट्रेट बनाकर लिम्का बुक रिकार्ड, एशिया बुक रिकार्ड, इंडिया बुक रिकार्ड, चाइना बुक ऑफ रिकार्ड, नेपाल रिकार्ड, यूनिक वर्ल्ड रिकार्ड, वर्ल्ड रिकार्ड इंडिया और रिकार्ड होल्डर रिपब्लिक कुल मिलाकर कई रिकार्ड बुक्स में दर्ज करवा चुके हैं।
शुरुआती दौर में मुकेश थापा को 2004 में नेशनल अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया। इसके बाद उन्होंने भाषा एवं संस्कृति विभाग अवार्ड, 1993 में कांगड़ा कला संग्रहालय अवार्ड सहित कई दर्जनों इनाम अपने नाम दर्ज किए। मौजूदा समय में मुकेश थापा ने एक आर्ट गैलरी भी अपने निवास स्थान पर खोली है। इसमें उनकी बनाई गई पेंटिंग व उन्हें मिले अवार्ड को रखा गया है।
मुकेश ने बताया कि वह अपनी आर्ट गैलरी में लोगों को पेंटिंग सिखाना चाहते हैं, लेकिन काम की व्यस्तता के चलते ऐसा नहीं कर पाते हैं। उन्हें कई लोग पेंटिंग सिखाने के लिए कहते हैं, लेकिन टाइम न होने के कारण वह उन्हें समय नहीं दे पा रहे हैं। मुकेश थापा ने अभी तक हिमाचल की खूबसूरत वादियों की प्राकृतिक खूबसूरती और भोले-भाले राज्य के सजीव नेचुरल लोगों, बच्चों और जानवरों को अपने रंगों के हुनर से कैनवास पर उतार रहे हैं।