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Shimla News: रोजगार पर संकट, रेस्तरां-ढाबे बंद कर संचालकों ने घर भेजे कर्मचारी

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राजधानी में 500 से ज्यादा हैं ढाबे और रेस्तरां
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गैस की आपूर्ति न मिलने से नहीं बन रहा है खाना
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में व्यावसायिक गैस सिलिंडर की आपूर्ति ठप होने से अब हजारों लोगों के रोजगार पर भी संकट मंडरा गया है। शहर में कई ढाबों, होटलों और रेस्तरां संचालकों ने काम ठप होने के बाद कर्मचारियों को घर भेजना शुरू कर दिया है।

बिना गैस के खाना बनाने का काम लगभग बंद हो गया है। ऐसे में शहर में कई ढाबों पर ताले लग चुके हैं। कई ढाबों, रेस्तरां और होटलों में तो हालत यह है कि कर्मचारियों के लिए भी खाना बनाने के लिए गैस नहीं बची है। मजबूरन कर्मचारियों को हालात सामान्य होने तक घर भेजा जा रहा है। राजधानी में 500 से ज्यादा ढाबे, रेस्तरां, टी शॉप और छोटे होटल हैं। इनमें हजारों लोग काम करते हैं। 90 फीसदी से ज्यादा संस्थानों में व्यावसायिक सिलिंडर से खाना पकता है। शहर में इलेक्टि्रानिक उपकरणों, कोयला और मिट्टी तेल का इस्तेमाल बहुत कम है। हालांकि, अब गैस की आपूर्ति ठप होने के बाद कारोबारी इनकी खरीद भी कर रहे हैं। शिमला व्यापार मंडल अध्यक्ष संजीव ठाकुर का कहना है कि गैस संकट का सबसे ज्यादा असर होटल, ढाबे, रेस्तरां कारोबारियों पर पड़ा है। सिलिंडर न मिलने से कई ढाबे बंद हो चुके हैं। यदि यही हाल रहा तो इस बार पर्यटन कारोबार और इससे जुड़े लोगों को काम भी चौपट हो जाएगा।
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स्टॉक खत्म, नहीं मिल रहे स्टोव
जिला प्रशासन की ओर से कारोबारियों को मिट्टी तेल मुहैया करवाने का दावा किया है। इसके बाद शहर के कई कारोबारियों ने दुकानों से स्टोव खरीदना शुरू कर दिए हैं। शहर के कई दुकानों में स्टोव का स्टॉक भी खत्म हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि अब नया स्टॉक मंगाया जा रहा है। आमतौर पर शहर में स्टोव की बेहद कम बिक्री थी। इसलिए ज्यादातर बर्तन कारोबारियों ने चंद स्टोव ही बिक्री के लिए रखे थे। लोअर बाजार के बर्तन कारोबारी रमेश कुमार ने बताया कि इंडक्शन के साथ स्टोव की डिमांड बढ़ी है। अब नया स्टॉक मंगाया है।
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