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प्रमोशन के बाद भी ग्रेड पे को इंतजार

Sun, 14 Sep 2014 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग में प्रमोशन तो की, लेकिन पदोन्नति के लाभ से वंचित कर दिया। 15 साल से विभाग में काम करने वाले अध्यापकों को भी पदोन्नति के दो साल ग्रेड पे के लिए इंतजार करना होगा। प्रदेश शिक्षक महासंघ ने इसका विरोध किया है और सरकार से इस शर्त को हटाने की मांग की है।
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महासंघ के अध्यक्ष पवन मिश्रा और प्रवक्ता डा. मामराज पुंडीर ने कहा कि प्रमोशन पर ग्रेड पे को दो साल बाद की शर्त केवल शिक्षा विभाग में लगती है। जब कोई जेबीटी से एचटी बनता है तो उसकी ग्रेड पे बढ़ जाती है। यानी, 4200 से 4400 हो जाती है। एचटी से सीएचटी बनता है ग्रेड पे 4400 से 4800 हो जाती है।

जब कोई क्लर्क से जूनियर असिस्टेंट बनता है तो उनकी ग्रेड पे 1900 से 2800 होती है। जूनियर असिस्टेंट से सीनियर असिस्टेंट बनने पर 2800 से 4400 हो जाती है। उसी तरह डिप्टी डायरेक्टर से ज्वाइंट डायरेक्टर में प्रमोशन पर 6600 से 7600 और ज्वाइंट डायरेक्टर से एडिशनल डायरेक्टर को 7600 से 7800 ग्रेड पे मिलती है।
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कोई जेबीटी से टीजीटी, सीएंडवी से टीजीटी, टीजीटी से पीजीटी और लेक्चरर बनता है तो उन्हें दो साल तक ग्रेड पे के लिए क्यों इंतजार करना होता है। महासंघ मामले को वित्त सचिव और शिक्षा सचिव के समक्ष भी रख चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। डा. मामराज पुंडीर ने सरकार से मांग की है की हिमाचल में सभी आईएएस अधिकारियों को अनुबंध पर लगाएं।

डरे हुए महसूस कर रहे कर्मचारी
महासंघ के अनुसार कर्मचारियों का आर्थिक शोषण के साथ मानसिक शोषण भी होता रहा है। पवन मिश्रा ने कहा कि आज हिमाचल का कर्मचारी डरा हुआ महसूस कर रहा है। अधिकारी छोटे-छोटे कर्मचारियों का मानसिक शोषण कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण जिला सिरमौर में कमलेश दत्त शर्मा की आत्महत्या का मामला है। अभी तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सरकार बताए कि इस आत्महत्या का जिम्मेवार कौन है?
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