प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व पदाधिकारियों ने वीरभद्र सिंह सरकार पर डीओ नोट के नाम पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगाया है। पूर्व पदाधिकारियों का कहना है कि इस अवैध व अघोषित उद्योग के जरिये सरकार के मुलाजिम अपनी जेबें गरम कर कर्मचारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं।
उनका आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद डीओ नोट पर हजारों तबादले किए जा रहे हैं।महासंघ के पूर्व अध्यक्ष पुरुषोत्तम गुलेरिया, पूर्व महासचिव हेमराज शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष एलआर कौंडल ने कहा कि चुनाव आयोग से डीओ नोट पर हो रहे तबादलों के उद्योग की शिकायत कर मामले की जांच कराने की मांग की जाएगी।
पदाधिकारियों ने कहा कि जिस दिन से प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी है, उस दिन से तबादला उद्योग सक्रिय हो गया है। हालात यह हैं कि पांच सालों में कर्मचारी वर्ग स्थिर होकर कार्य नहीं कर पा रहा है और उसे हर समय तबादले का डर सता रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकतर तबादले डीओ नोट पर हो रहे हैं और विभागाध्यक्ष की अनुशंसा को नजरअंदाज किया जा रहा है। कहा कि नई सरकार के गठन के बाद विवादास्पद और नियमों के विपरीत की जा रही भर्तियों की जांच की मांग उठाई जाएगी। यही नहीं, जरूरत पड़ी तो तबादला उद्योग और भर्तियों की जांच के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।