लेकिन हिमाचल सरकार ने सिर्फ वाहवाही लूटने के चक्कर में अधूरी तैयारी के बीच ही यह लांचिंग कर दी। दरअसल, इस सिस्टम के लिए एक कंट्रोल रूप बनाया जाना था जिसमें पुलिस, अग्निशमन और एंबुलेंस जैसी इमरजेंसी सेवाओं के संबंध में शिकायत दर्ज की जाती।
पहले चरण में सिर्फ पुलिस को इस सेवा से जोड़ते हुए लांचिंग की तैयारी की गई। लेकिन पुलिस के हर जिले के लिए होने वाली तेरह वाहनों की खरीद ही नहीं की गई।
इन वाहनों में जीपीएस डिवाइस लगे होने थे जिससे गाड़ी की लोकेशन और शिकायत पहुंचने के बाद गाड़ी के शिकायतकर्ता के पास पहुंचने तक कंट्रोल रूम की नजर रहती।
लेकिन हाल यह है कि पुराने पुलिसिंग तंत्र के बूते ही 112 लागू किया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार से जब इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किए गया तो उन्होंने बात नहीं की।