सुक्खू से निवेदन है कि कांग्रेस पार्टी को आगामी लोक सभा चुनाव में विजयी बनाने के लिए आपसी गुटबाजी को नजरअंदाज करते हुए एकजुट हो जाएं। कांग्रेस के 11 विधायकों आशा कुमारी, धनीराम शांडिल, आईडी लखनपाल, नंद लाल, जगत सिंह नेगी, राजेंद्र राणा, मोहन लाल ब्राक्टा, विक्रमादित्य सिंह, विनय कुमार, आशीष बुटेल और पवन काजल के नाम से सोमवार को जारी बयान जारी कर यह बात कही।
इन विधायकों ने कहा कि वीरभद्र सिंह न केवल हिमाचल कांग्रेस बल्कि पूरे भारत में वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं। इन्होेंने पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर डा. मनमोहन सिंह तक के भारत के प्रधानमंत्रियाें के साथ कार्य किया है। प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री, कई बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवा कर चुके हैं। सुक्खू का बयान न केवल वीरभद्र सिंह को अपमानित करता है अपितु कांग्रेस पार्टी और प्रदेश के लोगों को भी अपमानित करने वाला है।
सुखविंद्र पिछले छह साल से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे थे। उनकी निष्क्रिय कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए और लोकसभा के चुनावों के दृष्टिगत उनकी जगह नया अध्यक्ष को बनाने का निर्णय कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लिया। उनका यह बयान हास्यास्पद है कि वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व को गुमराह किया। सुक्खू ने कांग्रेस में कई नियुक्तियां स्थानीय विधायकों की इच्छा के विरुद्ध कीं।