कल मौके पर जाएंगे महापौर, बैठक में कंपनी ने सोमवार से योजना के ट्रायल का किया था दावा, नहीं आई बिजली
तीन महीने से टल रहा है ट्रायल, मेयर से लेकर मंत्री तक के दावे हो चुके फेल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी की सबसे बड़ी सतलुज पेयजल योजना का ट्रायल एक बार फिर टल गया। सोमवार को शकरोड़ी में बिजली आपूर्ति न पहुंचने के कारण ट्रायल संभव नहीं हो पाया। अब महापौर सुरेंद्र चौहान बुधवार को खुद मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे।
इस योजना के ट्रायल को जून से ही बार-बार टाला जा रहा है। मेयर से लेकर शहरी विकास मंत्री तक के दावों के बावजूद अभी तक शकरोड़ी में बिजली आपूर्ति ही सुनिश्चित नहीं हो पाई है। पेयजल कंपनी का कहना है कि जल भंडारण टैंक और पंपिंग स्टेशन तैयार हो चुके हैं। बिजली आपूर्ति मिलते ही सतलुज से पानी लाकर टैंकों को भरा जाएगा। इसी दौरान टैंकों की टेस्टिंग और फिल्टर टैंकों की क्षमता जांची जाएगी।
कंपनी के मुताबिक, करीब एक सप्ताह तक शकरोड़ी में ही ट्रायल चलेगा। इसके बाद शकरोड़ी से दवाडा तक पानी की आपूर्ति की जाएगी। दवाडा में दूसरे चरण का पंपिंग स्टेशन बना है, लेकिन यहां भी अभी बिजली नहीं पहुंची है। दवाडा से डूम्मी और फिर डूम्मी से संजौली टैंक तक पानी पहुंचाने की योजना है।
बीते हफ्ते महापौर ने कंपनी और बिजली बोर्ड अधिकारियों की बैठक ली थी। उस दौरान बोर्ड ने आठ सितंबर से शकरोड़ी में बिजली आपूर्ति शुरू करने का दावा किया था। हालांकि मौके पर पैनल और ट्रांसफार्मर लगाने का काम पूरा हो चुका है, लेकिन बिजली आपूर्ति अब तक शुरू नहीं हुई है।
सतलुज योजना : 2050 तक नहीं रहेगा जलसंकट
66 एमएलडी क्षमता वाली सतलुज पेयजल योजना से शिमला में पानी का संकट 2050 तक नहीं रहेगा। पहले चरण में 15 एमएलडी पानी की सप्लाई शुरू करने की तैयारी है। महापौर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि बुधवार को कंपनी अधिकारियों के साथ शकरोड़ी का दौरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रायल में लगने वाले समय और अन्य औपचारिकताओं पर रिपोर्ट ली जाएगी। सोमवार को टाउनहॉल में भी महापौर ने कंपनी अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट तलब की और निर्देश दिए कि शकरोड़ी में ट्रायल की औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएं।