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हिमाचल में महंगी हो सकती है बिजली, नियामक आयोग को दी याचिका

Wed, 16 Jan 2019 12:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल के साढ़े 19 लाख घरेलू उपभोक्ताओं और 30 हजार औद्योगिक घरानों को दो साल बाद अप्रैल माह से बिजली का झटका लग सकता है। राज्य बिजली बोर्ड ने वर्ष 2019-20 में बिजली की दरें बढ़ाने के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग में पिटीशन दायर कर दी है।

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इसमें साल 2018 में हुए करीब 200 करोड़ रुपये के घाटे और बीते दो सालों से घरेलू दरें न बढ़ाने का हवाला दिया गया है। बिजली बोर्ड का सालाना खर्च करीब 5600 करोड़ रुपये है। वर्तमान की बिजली दरों से बोर्ड को करीब 4600 करोड़ रुपये और पड़ोसी राज्यों को बिजली बेचकर 800 करोड़ की आय हो रही है।

ऐसे में 2018 में बिजली बोर्ड को करीब 200 करोड़ का घाटा हुआ है। बोर्ड के प्रबंध निदेशक जेपी कालटा ने कहा कि आयोग के समक्ष पिटीशन दायर की है। दरें बढ़ाने पर आयोग की फैसला लेगा। 

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साल 2016 में बढ़ाई थीं बिजली दरें 

हिमाचल में साल 2016 में घरेलू बिजली की दरें 3.5 फीसदी बढ़ाई थीं। इससे पूर्व साल 2014-15 में बिजली दरों को बढ़ाया गया था। चुनावी साल 2017-18 और 2018-19 में भी घरेलू बिजली की दरें नहीं बढ़ाईं। हालांकि, 2018-19 में घरेलू उपभोक्ताओं का 10 रुपये फिक्स चार्ज बढ़ाया था। 

बीते साल उद्योगों को लगा था झटका 
बीते साल विद्युत नियामक आयोग ने औद्योगिक इकाइयों और गैर घरेलू और गैर व्यावसायिक उपभोक्ताओं को दी जाने वाली बिजली की दरों में डेढ़ फीसदी की बढ़ोतरी की थी। व्यावसायिक उपभोक्ताओं को दी जाने वाली बिजली ढाई फीसदी महंगी की थी।
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साल 2018-19 की बिजली दरें

स्लैब             तय बिजली दर                सब्सिडी के बाद
प्रति माह         रुपये प्रति यूनिट         रुपये/प्रति यूनिट

यूनिट में           (2018-19)            (2018-19)
0-60                3.30                         1.0
0-125              3.90                         1.50
126-300          4.80                          2.90
301 से ऊपर       5.40                         4.35
प्री पेड मीटर        4.80                         2.90
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