राजधानी शिमला में बिजली बोर्ड ने उपभोक्ताओं को भारी भरकम बिल जारी कर दिए हैं। हैरानी की बात है कि अधिकतर दुकानें कर्फ्यू के कारण बंद पड़ी हैं, इसके बावजूद व्यापारियों को एक हजार रुपये तक के बिल जारी कर दिए हैं। हैरत इस बात की है कि तीन मई तक घोषित लॉकडाउन के बीच बिल जमा करने की अंतिम तिथि भी 24 अप्रैल तय कर दी है।
शिमला में अधिकतर लोग किराये के भवनों पर रहते हैं, उन्हें भी एक माह का बिल एक से दो हजार रुपये के करीब आया है। भारी भरकम बिजली बिल आने से उपभोक्ताओं ने बिजली बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ताओं ने दो टूक कहा है कि कर्फ्यू के दौरान बिजली बोर्ड को राहत देने की आवश्यकता थी लेकिन भारीभरकम बिल थमाकर उल्टा मुसीबत में डाल दिया।
शहर के व्यापारी विपुल पालम, अंकित, सुरेश और अखिलेश ने कहा कि कर्फ्यू लागू होने के बाद उनकी दुकानें बंद हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि बिजली बंद रखने के बावजूद बोर्ड ने किस हिसाब से बिल जारी किए हैं। यही नहीं बीते माह के दौरान भी उपभोक्ताओं को बोर्ड ने हजारों के बिल थमाए थे। कारोबारियों ने कहा कि कर्फ्यू के कारण उनका कारोबार ठप है। ऐसे में सरकार को उन्हें सहायता प्रदान करनी चाहिए लेकिन यह बिजली के भारीभरकम बिल दे दिए हैं।
लॉकडाउन तीन मई तक सरकार ने घोषित कर रखा है, ऐसे में सवाल उठता है कि 24 अप्रैल बिल जमा करने की अंतिम तिथि किस आधार पर तय की गई। कई परिवार ऐसे भी हैं जो ऑनलाइन बिल जमा नहीं कर सकते।
बिजली बोर्ड के एसई लोकेश ठाकुर ने कहा कि इस माह के बिल पिछले बिलों के औसत के आधार पर जारी किए गए हैं। बिलों की राशि अधिक है तो उपभोक्ता बिजली बोर्ड के स्थानीय कार्यालय में संपर्क करें।