देश के छावनी क्षेत्रों में फिर चुनाव टल गए हैं। रक्षा मंत्रालय की ओर से 56 छावनियों के मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल आगामी छह माह के लिए बढ़ा दिया है। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय से लिखित आदेश जारी कर दिए हैं। ऐसे में मनोनीत सदस्य ही छावनियों का विकास कार्य देखेंगे और सरकार को विकास कार्यों का प्रस्ताव भेजेंगे। इससे पहले भी चुनावों को टालते हुए छावनी क्षेत्रों में मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश समेत देश की छावनियों के सिविल एरिया को स्थानीय नगर निकायों में बदलने की प्रक्रिया चल रही है। रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में रंगीन नक्शा मंगवाया है ताकि छावनी के प्रत्येक क्षेत्र की जानकारी आसानी से मिल सके।
जिस पर कैंट बोर्ड कार्य कर रहे हैं। इसी बीच प्रदेश के योल कैंट के कुछ क्षेत्र को स्थानीय नगर निकायों में मिलाया जा चुका है। इस प्रक्रिया को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से बार-बार चुनावों को टला जा रहा है और मनोनीत सदस्यों को ही जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। वर्तमान में भी रक्षा मंत्रालय ने 56 कैंट क्षेत्रों में मनोनीत सदस्य का कार्यकाल 10 फरवरी को खत्म हो रहा है। ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है और सदस्यों का कार्यकाल 11 फरवरी से आगामी छह महीने तक और बढ़ा दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जब तक बोर्ड का गठन नहीं हो जाता, तब तक मनोनीत सदस्य ही कार्य को देखेंगे।
कैंट को सिविल क्षेत्र में मर्ज करने से मिलेगी राहत
कैंट क्षेत्र में रहने वाले लोगों को नगर निकायों में शिफ्ट करने से काफी राहत मिलेगी। प्रदेश कैंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार सिगंला, कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष मनीष शर्मा, महासचिव मनमोहन शर्मा और सलाहकार सुभाष शर्मा ने बताया कि कैंट क्षेत्र में भूमि पर रह रहे बाशिंदे का मालिकाना हक नहीं है। पंचायतों की तरह परिवार रजिस्टर नहीं है। इस कारण दस्तावेज लेने मुश्किल हो जाते हैं। इसी के साथ विकास के लिए राज्य सरकार से कोई फंड भी मुहैया नहीं होता।