हिमाचल में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव तय समय पर होंगे। पंचायतों के पुनर्गठन पर विधानसभा में गुरुवार को पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि 15 वर्षों से हिमाचल में नई पंचायतों का गठन नहीं हो सका है। सरकार ने जनप्रतिनिधियों और जनता के प्रस्तावों पर नई पंचायतों का गठन किया है। पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि पुनर्गठन पूरा होते ही चुनाव संबंधी आगामी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
करसोग से विधायक हीरालाल की ओर से पूछे सवाल के जवाब में हस्तक्षेप कर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से नई पंचायतों का गठन नहीं हुआ। 2010 में नई पंचायतें बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन जनगणना कार्य के कारण नहीं हो पाया था। अब 2020 में पंचायत चुनाव से पहले नई पंचायतों के गठन के प्रस्ताव आए हैं। कई इलाके दूरदराज और पिछड़े हैं, वहां पर नई पंचायतों के गठन में तय नियमों में थोड़ी ढील दी गई है।
पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि साल 2005 में 206 नई पंचायतें बनी थीं। हिमाचल में कई इलाके पिछड़े हैं, वहां बड़ी-बड़ी पंचायतें हैं। अभी भी पंचायत मुख्यालय के लिए 20 से 25 किलोमीटर जाना पड़ता है। इसलिए सरकार ने 325 नई पंचायतों का गठन कर दिया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। मंत्री ने कहा कि पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को टाला नहीं जा सकता है और यह समय पर होंगे। इस सवाल को लेकर विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने कहा कि बड़सर में तीन पंचायतों को अलग किया है।
इनमें से एक पंचायत को फिर से पुरानी में मिलाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने पंचायत चुनाव को लेकर सरकार वोटर लिस्ट को कब तक फाइनल करने, आरक्षण रोस्टर कब लागू होने और आचार संहिता को लेकर सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी पिछड़ी पंचायतों के लिए मापदंड बदले। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र पर ही आपकी नजर क्यों रहती है, जबकि लोगों के सुझाव और मांग के आधार पर प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में नई पंचायतों का गठन किया गया है।