सिरमौर के शिलाई की बेटियों के आठवीं से पहले स्कूल छोड़ने का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक अमला ही नहीं, बल्कि कई विभाग हरकत में आ गए हैं। शिलाई उपमंडल में एक साल की अवधि में आठवीं से पहले स्कूल छोड़ने वाली बेटियां हर हाल में स्कूल जाएंगी। इसके लिए प्रशासन, शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग हरकत में आया है। विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों ने रिपोर्ट तलब की है।
गौरतलब है कि वर्ष 2015-16 के सत्र में शिलाई उपमंडल की लगभग 400 लड़कियों ने स्कूल जाना छोड़ दिया। इनमें अधिकतर छठी से आठवीं तक की लड़कियां शामिल हैं। आईसीडीएस की इस रिपोर्ट के बाद पूरा तंत्र हरकत में आया है। ‘अमर उजाला’ ने 28 नवंबर के अंक में ‘आठवीं से पहले स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहीं शिलाई की बेटियां’ शीर्षक से यह मामला प्रमुखता से उठाया था।
इसके बाद अब बेटियों को पुन: स्कूल में दाखिल करवाने के लिए जद्दोजहद शुरू की जा रही है। भले ही इस प्रक्रिया में वक्त लग सकता है, लेकिन सकारात्मक परिणाम सामने आने की भी प्रबल उम्मीद है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बेटियों के पुन: दाखिले के लिए जागरूकता अभियान चलाने के आदेश दिए हैं।
विभाग की निदेशक मानसी सहाय ठाकुर ने बताया कि इस बारे विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी, सीडीपीओ को इस मामले की पूरी रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। वहीं, इसका प्लान भी मांगा है कि लड़कियों को पुन: स्कूल में कैसे दाखिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इधर, शिक्षा विभाग ने भी मामले की रिपोर्ट तलब की है। शिक्षा उप निदेशक पूनम सूद ने बताया कि मामला गंभीर है। उन्होंने बीआरसी अपर प्राइमरी को मामले की छानबीन के आदेश दिए हैं। विभाग इलाके में विशेष जागरूकता अभियान चलाएगा। बेटियां क्यों स्कूल छोड़ने को मजबूर हुईं, इसकी भी जांच की जाएगी।
प्रशासन तय करेगा जिम्मेवारी
शिलाई प्रशासन ने तो इस मामले में जिम्मेदारियां भी तय कर दी हैं। स्कूल प्रिंसिपल, पंचायत प्रधान और स्कूल छोड़ने वाले अभिभावकों की विशेष बैठक होगी। छह, सात और आठ दिसंबर को सभी पंचायतों के परिजन, प्रिंसिपल और पंचायत प्रधान बारी-बारी बुलाए जाएंगे। एसडीएम विकास शुक्ला ने कहा कि हर हाल में बेटियों को स्कूल में दाखिल करवाया जाएगा। इसके लिए जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।