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शिक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में बुलंद की हिमालयन राज्यों की आवाज, उठाई ये मांगे

Tue, 16 Jan 2018 12:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने नई दिल्ली में हिमालयन राज्यों की आवाज बुलंद की। हिमाचल के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजूकेशन की 65वीं बैठक में रूसा, आरएमएसए और एसएसए की फंडिंग बढ़ाने की पैरवी की। 

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उन्होंने कहा कि हिमाचल सहित हिमालयन राज्य बॉर्डर पर स्थित हैं। इन राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां भी अन्य राज्यों से भिन्न हैं। हिमालयन राज्यों की जिम्मेवारी अधिक होने के चलते केंद्र सरकार को फंडिंग बढ़ानी चाहिए।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर की अध्यक्षता में आयोजित सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजूकेशन की बैठक में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने शिक्षा क्षेत्र में हिमाचल की ओर से शुरू की गई विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी। 

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नई तबादला नीति का प्रस्ताव भी किया साझा

बताया कि प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड और राज्य विश्वविद्यालय में डिग्रियों और डिप्लोमा डिजिटल किए जा रहे हैं। इस योजना के पूरा होते ही विद्यार्थियों को एक क्लिक पर डिग्री-डिप्लोमा मिल जाएंगे। इससे बोर्ड और विश्वविद्यालय प्रबंधन का काम भी कम होगा।

सुरेश भारद्वाज ने शिक्षकों के लिए बनाई जा रही नई तबादला नीति का प्रस्ताव भी साझा किया। कहा कि शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार तबादले करने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगने पर विचार कर रही है। नई नीति बनाने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा की तबादला नीति को स्टडी किया जा रहा है।
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स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने का बताया प्लान

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बैठक के दौरान हिमाचल के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए तैयार किए प्लान को भी साझा किया। कहा कि स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा देने पर बल दिया जा रहा है। स्कूलों में कंप्यूटर और साइंस लैब बढ़ाने की योजना है। वाईफाई की सुविधा भी स्कूलों में दी जाएगी।

आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति में मांगा बदलाव
शिक्षा मंत्री ने पहली से आठवीं कक्षा तक फेल नहीं किए जाने की नीति में बदलाव करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक बच्चों के लिए लक्ष्य नहीं रखा जाएगा, तब तक बच्चे शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं होंगे। नवीं और दसवीं के परीक्षा परिणाम खराब रहने का नो डिटेंशन पॉलिसी बड़ा कारण है।
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