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सरकारी स्कूलों में शिक्षा को लेकर बड़ा खुलासा

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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के स्कूलों में शिक्षा का स्तर निराशाजनक स्थिति में पहुंच चुका है। हालत यह है कि रेंडम सर्वे में ही सरकारी स्कूलों के बच्चे फेल हो गए हैं। सर्वशिक्षा अभियान के समन्वयकों ने प्रदेश के पांच जिलों के करीब 68 स्कूलों में पहले टर्म (अप्रैल से जून) में पढ़ाई के स्तर को जानने के लिए रेंडम सर्वे (मानीटरिंग) किया।
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इस दौरान इन स्कूलों के 3500 से लेकर 4000 के बीच लड़के लड़कियों के लिखित, मौखिक टेस्ट लिए गए। इसका रिजल्ट सर्वशिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, उच्चतर और प्रारंभिक शिक्षा विभागों के लिए चौंकाने वाला साबित हुआ। इसमें 70 से 80 फीसदी बच्चों के ई और ई पल्स ग्रेड आए हैं।

यानी ये बच्चे केवल 0 से 19 और 20 से 34 नंबर ही प्राप्त कर पाए। इसके अलावा अन्य 20 फीसदी बच्चों को ए ग्रेड (80 से 100), बी ग्रेड (65 से 79), सी ग्रेड (50 से 64) डी ग्रेड में (35 से 49) नंबर शामिल हैं।
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गिरा रहा है लर्निंग स्टैंडर्ड

सर्व शिक्षा अभियान की ओर से गठित मानीटरिंग टीमों ने पाया कि प्राइमरी की अपेक्षा अपर प्राइमर स्कूलों के विद्यार्थियों का लर्निंग स्टैंडर्ड गिरा है। सर्वे में सामने आया है कि 80 फीसदी बच्चे तीन प्रमुख विषयों हिंदी, इंग्लिश और मैथ में सबसे कमजोर हैं।

क्लालिटी एजूकेशन की मानीटरिंग टीमों ने चंबा के 16, कांगड़ा के 07, सोलन के 15, मंडी के 15 और कुल्लू के भी 15 प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों का लर्निंग स्टैंडर्ड चैक किया। पांच जिलों की मानीटरिंग रिपोर्ट की प्रेजेंटेशन देखने के बाद सर्वशिक्षा अभियान के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने इन जिलों से सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश जारी किए हैं।

इसमें छह निश्चित सेक्टरों में कार्य करने के निर्देश जारी कर उन्हें गंभीरता से लेने की बाद कही है। इनमें सबसे पहले स्कूल प्रमुखों को प्रबंधन सही तरह के करने के लिए एक मैनेजर की तरह काम करने को कहा है।
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'शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए हम संजीदा'

इसके अलावा लर्निंग लेबल तक पढ़ाई करवाना सुनिश्चित करना, कंटिनुअस क्लास इवेलुएशन, कम्युनिटी पार्टिसिपेशन को बढ़ावा देना, इफेक्टिव स्कूल डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के अलावा आरटीई के प्रावधानों के तहत पढ़ाई सुनिश्चित करवाना शामिल है।

सर्व शिक्षा अभियान के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर घनश्याम चंद ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए मंथन चल रहा है। पांच जिलों की मानीटरिंग रिपोर्ट की प्रेजेंटेशन बहुत निराशाजनक है। सरकार भी शिक्षा को लेकर गंभीर है।

शिक्षकों को सकारात्मक रवैया अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही दोनों निदेशालयों के साथ मिलकर मानीटरिंग कमेटियां बनाई जाएंगी, जो अब तक सर्वशिक्षा अभियान के तहत ही बनती थी।
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