89 हजार सरकारी स्कूल अब तक हो चुके हैं बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की राज्य कमेटी ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर और राज्य सचिव सनी सेक्टा ने कहा कि विकसित भारत के दावों के बीच शिक्षा को हाशिये पर रखा है।
संगठन ने आरोप लगाया कि शिक्षा पर कुल खर्च जीडीपी का 3 से 4 प्रतिशत ही है जबकि वर्षों से 6 प्रतिशत की मांग की जा रही है। एसएफआई ने कहा कि प्राथमिकता घटने का असर स्कूलों पर साफ दिख रहा है। दावा किया कि 2014–15 से 2023–24 के बीच करीब 89 हजार सरकारी स्कूल बंद या मर्ज हुए हैं जिससे ग्रामीण और गरीब तबकों के बच्चों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। शिक्षकों की कमी को भी गंभीर बताया गया। संगठन के अनुसार लाखों पद शिक्षकों के खाली हैं और 33 लाख से अधिक बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ रहे हैं जहां सिर्फ एक शिक्षक है। ड्रॉपआउट संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि 65.7 लाख से ज्यादा बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं जिनमें बड़ी संख्या लड़कियों की है। बजट में आंगनबाड़ी और पोषण योजनाओं की सीमित बढ़ोतरी को भी अपर्याप्त बताया। अनिल ठाकुर और सनी सेक्टा ने इस बजट को छात्र-विरोधी बताते हुए देशभर में विरोध तेज करने का आह्वान किया।
रोजगार के लिए कुछ नहीं : अंकित
एनएसयूआई के महासचिव अंकित जयाण ने कहा कि बजट में युवाओं के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। बजट में कई योजनाओं की घोषणा हुई लेकिन यह साफ नहीं है कि आने वाले समय में रोजगार के अवसर कितने होंगे और किस स्तर के होंगे। अंकित जयाण ने कहा कि पिछली रोजगार संबंधी घोषणाओं की समीक्षा आज तक पारदर्शी रूप से सार्वजनिक नहीं की गई। कितने रोजगार वास्तव में सृजित हुए और कितने केवल कागजों तक सीमित रह गए, इस पर सरकार की ओर से कोई ठोस जानकारी नहीं दी है।