हिमाचल में सामने आए 250 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त कुछ निजी शिक्षण संस्थानों के मालिकों ने होटल और शराब के ठेके भी खोल दिए हैं। इन्होंने इसी बीच जमीन की भी खरीद-फरोख्त की है। सीबीआई की जांच में इसका खुलासा हुआ है। इनके पास आय से अधिक संपत्ति है, जिसे प्रवर्तन निदेशालय जब्त कर रहा है। सीबीआई ने अब तक की जांच के तहत करीब 28 निजी संस्थानों को छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त पाया है। इनमें से 15 संस्थानों की जांच पूरी हो चुकी है। इनके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। 13 निजी शिक्षण संस्थानों की जांच चल रही है। यह घोटाला 2013 से 2019 के बीच हुआ है।
मनी लांड्रिंग की आशंका के चलते वर्ष 2019 में ही मामला ईडी को भेजा गया था। सीबीआई की दबिश के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) छापे मार मार रहा है। बीते मंगलवार को शिमला और मंडी में छापे के बाद टीम जरूरी दस्तावेज साथ ले गई है। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में सीबीआई को मनी लॉन्ड्रिंग के मिले साक्ष्यों के आधार पर ईडी ने यह कार्रवाई अमल में लाई। जांच के दायरे में चल रहे संस्थानों ने करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति हड़पकर उसे कहां निवेश किया, इस पहलू पर भी जांच चल रही है। ऐसे में यदि जांच में साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित संपत्तियों को ईडी अटैच करते हुए आगामी कार्रवाई अमल में लाएगी।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति हुई जारी
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर हर स्तर पर अनियमितताएं बरती गईं। आपसी मिलीभगत से निजी संस्थानों को पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति के लिए बजट जारी हुआ। यही कारण रहा है कि छात्रवृत्ति का 80 प्रतिशत बजट निजी और 20 प्रतिशत बजट सरकारी संस्थानों को जारी हुआ।