दुर्लभ पशु-पक्षियों, वन्य प्राणियों और वनस्पतियों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने हिमाचल के चार वन्य प्राणी अभ्यारण्यों को ईको सेंसटिव जोन घोषित किया है। केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। ये अधिसूचित वन्य प्राणी अभ्यारण्य चायल, पौंग डैम, द्रांगघाटी और बांडली हैं।
अब इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों, खनन, निर्माण और पेड़ कटान जैसे कार्यों पर रोक लग जाएगी। भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने चारों ईको सेंसटिव जोन की घोषणा करने के बाद अब आम लोगों से इस बारे में सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
न उद्योग लगेंगे न होगा खनन
-जल, वायु, मिट्टी या ध्वनि प्रदूषण करने वाले उद्योग नहीं लगेंगे।
-वाणिज्यिक खनन सहित तमाम प्रकार के खुदाई कार्यों पर रोक। मौजूदा क्रशरों और नए क्रशरों पर रोक।
-मौजूदा और नई आरा मशीनों पर पूर्ण रोक।
-संकटग्रस्त पदार्थों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध।
-संरक्षित क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर किसी भी नए होटल और विश्राम स्थल को मंजूरी नहीं दी जाएगी। हालांकि, पर्यटकों के लिए ईको फ्रेंडली टूरिज्म के तहत अस्थायी ठिकाने विशेष अनुमति से बनाए जा सकेंगे। रोपवे भी नहीं लगेंगे।
-राज्य सरकार के सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वन, सरकारी, राजस्व या निजी भूमि पर भी किसी पेड़ का कटान नहीं होगा।
पौंग डैम लेक सेंचुरी कांगड़ा- पौंग डैम लेक सेंचुरी कांगड़ा जिले में 207.59 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है। यहां पशु-पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियों के अलावा इंडियन और विदेशी तितलियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं।
द्रांगघाटी अभ्यारण्य जिला शिमला- जिला शिमला के रामपुर स्थित द्रांगघाटी अभ्यारण्य 167 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां तीतर की लुप्त होती प्रजातियां पश्चिमी ट्रागोपन और दुर्लभ स्तनपायी कस्तूरी मृग (मस्क डियर) भी इस क्षेत्र में पाया जाता है।
वन्यजीव अभ्यारण्य बांडली मंडी- 32.11 वर्ग किलोमीटर में फैला वन्यजीव अभ्यारण्य बांडली मंडी जिले में है। यहां फेलन थुसिलिंबिका, अकाकि कैटेचू, कासिया फिस्टुला, डालबेरजियासिस, टरमिनालियाबेलीरेका, सईजिजूमक्यूमिनी, सिनामोमूमटामाला, फिनोक्स और फिनूसरोक्सबूरधि आदि प्रमुख वनस्पतियां हैं। ब्लैक बीयर भी यहां विचरण करता है।
कई तरह के कार्यों पर लगेगा प्रतिबंध- ‘हिमाचल सरकार ने ही चारों वन्यजीव अभ्यारण्यों को ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का मामला भारत सरकार को भेजा था। चिन्हित क्षेत्रों में कई तरह के कार्यों पर प्रतिबंधित रहेगा। विशेष अनुमतियों के बाद निश्चित कार्य हो पाएंगे। इससे वन्यजीवों और वनस्पतियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।’ -दीपक सानन, अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन), हिमाचल सरकार