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Earthquake: हिमाचल के लाहौल-स्पीति में महसूस किए गए भूकंप के झटके, घरों से बाहर निकले लोग

Thu, 18 Apr 2024 10:33 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला

सार

उपायुक्त लाहौल-स्पीति राहुल कुमार ने कहा कि यदि आपके क्षेत्र के आसपास भूकंप के कारण कोई क्षति होती है तो इसकी सूचना 1077 पर दी जा सकती है।
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हिमाचल में महसूस हुए भूकंप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के केलांग जिला लाहौल-स्पीति में वीरवार रात करीब 8:53 बजे भूकंप के झटका महसूस किया है। भूकंप का केंद्र जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ में था। भूकंप की तीव्रता 4.0 आंकी गई है। धरती हिलने के बाद लोग अपने अपने घरों से बाहर निकल गए। हालांकि अभी तक कोई नुकसान की सूचना नहीं हैं।

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वहीं उपायुक्त लाहौल-स्पीति राहुल कुमार ने कहा कि यदि आपके क्षेत्र के आसपास भूकंप के कारण कोई क्षति होती है तो इसकी सूचना 1077 पर दी जा सकती है।

कब आता है भूकंप 
पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। 

जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
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कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।
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