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सॉफ्टवेयर बताएगा नाक-कान और गले की बीमारियां

Mon, 29 Aug 2016 11:06 AM IST
सतीश वालिया/अमर उजाला, धर्मशाला
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अमेरिका के बाद हिमाचल के दूसरे बड़े अस्पताल टांडा मेडिकल कॉलेज में ड्रा एमडी सॉफ्टवेयर से नाक, कान और गले की हर बीमारी का पता चलेगा। सॉफ्टवेयर से जिस भाग में बीमारी होगी, उसका उपचार भी डिस्प्ले होगा। इससे मरीज की नाक, कान और गले की जटिल से जटिल बीमारी का उपचार शीघ्र शुरू हो सकेगा।
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अकसर नाक, कान और गले की बीमारियां होने पर पहले टेस्ट करवाए जाते हैं। रिपोर्ट आने के बाद मरीज का उपचार शुरू होता है। खासकर कान में पस या पानी आने पर जख्म को सूखने में आठ से दस दिन लगते हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर में एंडोस्कोपी ऑप्शन पर क्लिक करते ही कान, कान और गले की स्कैनिंग शुरू हो जाएगी।

इसके बाद मरीज के प्रभावित भाग का चित्र सॉफ्टवेयर में डिस्प्ले करेगा। इससे प्रभावित भाग के उपचार का ब्योरा आने के बाद मरीज का इलाज शुरू होगा। ट्रायल बेस पर एक मरीज कान की बीमारी से ग्रस्त था। आठ दिन से कान में पानी आ रहा था।
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दूसरे अस्पतालों में दी गई दवाई खाने पर भी असर नहीं हुआ था। टीएमसी में सॉफ्टवेयर और एंडोस्कोपी करने के बाद बीमारी का इलाज संभव हुआ। मरीज के कान का जख्म एक ही दिन में सुखाया गया। अब सितंबर से ड्रा एमडी सॉफ्टवेयर से इलाज शुरू होगा।

टेस्ट रिपोर्ट आने से पहले ही शुरू होगा इलाज
पहले नाक, कान और गले की जटिल बीमारी होने पर टेस्ट करवाए जाते थे। रिपोर्ट के लिए कई बार बाहरी राज्यों की लैबों से ज्यादा समय लग जाता था। अब सॉफ्टवेयर के माध्यम से एंडोस्कोपी होने के बाद तुरंत इलाज शुरू होगा।

ईएनटी विभाग के प्रवक्ता डा. मनीष सरोच ने कहा कि ड्रा एमडी सॉफ्टवेयर से भी मरीजों का इलाज किया जाएगा। इसके माध्यम से मरीज के कान, नाक और गले की बीमारी की एंडोस्कोपी होने के बाद चित्र सहित बीमारी स्क्रीन पर डिस्प्ले होगी। इसके बाद इलाज करना आसान हो जाएगा।
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