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गांव-गांव पहुंचकर पशुपालकों से उपले खरीदेगा मिल्कफेड

Wed, 27 Nov 2019 01:25 PM IST
अरविन्द ठाकुर धर्मवीर गौतम, अमर उजाला, चुराग/करसोग (मंडी)
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- फोटो : अमर उजाला
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मिल्कफेड अब गांव-गांव पहुंचकर पशुपालकों से गोबर भी खरीदेगा। उपलों के रूप में गोबर को दुग्ध समितियों के माध्यम से खरीदा जाएगा। इन उपलों का इस्तेमाल प्रदेश के तमाम मिल्क प्लांटों के बायलर चलाने के लिए होगा। इससे जहां पशुपालकों को आर्थिक फायदा होगा, वहीं मिल्क प्लांट में डीजल से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा। 

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जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी हो सकती है। अभी तक उपलों का रेट तय नहीं किया गया है। मिल्कफेड के चेयरमैन निहाल चंद शर्मा ने कहा कि उपले खरीदने की योजना को जल्द ही शुरू किया जाएगा। मिल्क प्लांट के बायलर चलाने के लिए 50 प्रतिशत डीजल और 50 प्रतिशत के लगभग ब्रिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। मिल्कफेड की योजना डीजल की बजाय गोबर को इंधन के रूप में इस्तेमाल करना है।

मिल्कफेड अपने प्लांटों में बायलर चलाने के लिए हर महीने लगभग 50 लाख रुपये का डीजल फूंकता है। इसको कम करने के लिए मिल्कफेड ने लकड़ी के बुरादे आदि से बनने वाली ब्रिक्स का इस्तेमाल शुरू किया। इससे डीजल की खपत आधी रह गई है। अगर गोबर का इस्तेमाल किया जाएगा तो प्रति माह यह खर्च मात्र 12 से 15 लाख रुपये महीना रह जाएगा। 
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गो संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
उपले खरीदने से गो संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। लोग अपने पशुओं को लावारिस नहीं छोड़ेंगे। उनका गोबर बेचकर वे अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ कर सकते हैं।

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