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डॉ. प्रियरंजन: आत्महत्या करने के पीछे अवसाद मुख्य कारण

Sun, 25 Sep 2022 06:07 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा

सार

डॉ. प्रियरंजन अविनाश ने कहा कि आज के परिवेश में युवाओं में नौकरी और पढ़ाई को लेकर अवसाद बढ़ा है। जो युवा नशे के आदी हो जाते हैं, वे भी मानसिक अवसाद के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठा सकते हैं।
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डॉ. प्रियरंजन अविनाश - फोटो : संवाद
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विस्तार
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आत्महत्या करने वाले लोगों के पीछे मुख्य कारण अवसाद (डिप्रेशन) होता है। यदि कोई व्यक्ति दो सप्ताह से अधिक समय तक अवसाद में रहता है तो वह मनोरोग से ग्रसित हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन बोझ लगने लगता है। इसलिए वह आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाता है। यह बात अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक कार्यशाला के दौरान मेडिकल कॉलेज देहरादून से आए मनो चिकित्सक प्रियरंजन अविनाश ने अपने शोध पत्र में कही।

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उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में युवाओं में नौकरी और पढ़ाई को लेकर अवसाद बढ़ा है। जो युवा नशे के आदी हो जाते हैं, वे भी मानसिक अवसाद के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठा सकते हैं। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों पर निगरानी रखनी चाहिए। बच्चा अवसाद में हो तो मनो चिकित्सक की मदद लेनी चाहिए। उन्होंने अपने शोध पत्र में मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 में दी गई जरूरी जानकारियों से भी अवगत करवाया। 

उन्होंने कहा कि देश में जो भी गैर नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं, उन्हें एक्ट के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। ऐसा करने से देश में 90 प्रतिशत गैर नशा मुक्ति केंद्र बंद हो जाएंगे। उन्होंने फिल्मों में मानसिक मरीज को इलाज के दौरान दिए जाने वाले बिजली के झटकों को लेकर भी सच उजागर किया। उन्होंने कहा कि फिल्मों में मरीज को तड़पता दिखाया जाता है लेकिन असलियत में ऐसा नहीं होता है। बिजली के झटके देते समय अन्य ऑपरेशानों की तरह मरीज को एनेस्थीसिया देकर बेहोश किया जाता है ताकि उसे दर्द का अहसास न हो। 
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आयुष्मान योजना पर उठाए सवाल 
चिकित्सक प्रियरंजन अविनाश ने सरकार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना में मेंटल केयर हेल्थ के तहत मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पाता। इस योजना में सरकार ने निजी अस्पतालों को अन्य बीमारी का इलाज करने की अनुमति तो दे दी है लेकिन मेंटल हेल्थ को लेकर अनुमति नहीं दी है। राज्य की सबसे बड़ी जेल जहां 500 से अधिक कैदी रहते हों, वहां 20 बिस्तरों वाला मानसिक स्वास्थ्य का अस्पताल होना अनिवार्य है। इसकी व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है। 

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