कभी नौणी विवि के विद्यार्थी रहे डॉ. परिवंदर कौशल अब इसी विवि के कुलपति बन गए हैं। उन्होंने अपनी एमएससी वानिकी की पढ़ाई विश्वविद्यालय से हासिल की है। इसके बाद फ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ नैंसी से फॉरेस्ट्री में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। डॉ. कौशल पिछले 35 वर्षों से शिक्षण, अनुसंधान और विकास, विस्तार और प्रशासन में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
उन्होंने विभिन्न क्षमताओं में अलग अलग संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएं दी। इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन देहरादून (1979-1981), पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना में असिस्टेंट और एसोशिएट प्रोफेसर (1981-1992) और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची में वानिकी संकाय में डीन (2005-2009)। नौणी विश्वविद्यालय में वह पर्यावरण, जल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय वनीकरण और पर्यावरण विकास बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक और समन्वयक के तौर पर सेवाएं दीं। डॉ. कौशल ने 100 से अधिक शोध पत्र और तकनीकी रिपोर्ट प्रकाशित करने के अलावा 13 से अधिक पुस्तकों के अध्याय और मैनुअल लिखे हैं।
उन्होंने 26 विश्व कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है और 63 परियोजनाओं को संभाला है। कई पुरस्कारों से सम्मानित डॉ. कौशल को 1989 में राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और 2014 में हिमाचलश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें फ्रेंच सरकार की ओर से भी वर्ष 1984 में डॉक्टरल अनुसंधान के लिए फेलोशिप प्रदान की गई थी।