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दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे डॉक्टर, मरीजों का हाल-बेहाल

Sat, 04 Feb 2017 05:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश के करीब 1500 मेडिकल ऑफिसरों की दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक शनिवार को भी जारी रही। सुबह साढ़े नौ से साढ़े ग्यारह बजे तक हड़ताल के चलते प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी पूरी तरह प्रभावित है। हाल यह है कि शनिवार को तीमारदार मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक लेकर दौड़ते रहे लेकिन हड़ताल का हवाला देते हुए डॉक्टरों ने मरीजों को हाथ तक नहीं लगाया। वहीं, सरकार ने सात फरवरी को बातचीत के लिए हड़ताली डाक्टरों को बुलाकर फर्ज अदायगी कर ली है। 
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जबकि, सुनवाई न होने और मांगें न माने जाने से नाराज डाक्टर हड़ताल पर अड़े हुए हैं। डाक्टरों का कहना है कि सरकार को न तो डाक्टरों की चिंता है और न ही आम लोगों से कोई वास्ता है। यही कारण है कि हड़ताल के कई दिन पहले नोटिस के बावजूद किसी अधिकारी या मंत्री को बातचीत का समय नहीं मिला। 

मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा जीवानंद चौहान ने कहा कि सरकार जब तक उनकी मांगों को नहीं मानेगी, हड़ताल जारी रखेंगे। साथ ही यह भी कहा कि एक भी डॉक्टर का वेतन काटा गया तो सरकार को इसका भी जवाब दिया जाएगा। वहीं, प्रदेश के 1500 डॉक्टरों की हड़ताल के बीच प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना केंद्र सरकार के अफसरों के साथ एक जरूरी मीटिंग के लिए दिल्ली चले गए हैं। 
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ऐसे में अब 7 फरवरी से पहले बातचीत के सारे दरवाजे बंद हो गए हैं। वहीं, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने डाक्टरों की हड़ताल पर हाथ खड़े कर दिए हैं। बताते चलें कि सरकारी डाक्टरों ने 13 फरवरी तक हर रोज सुबह दो घंटे की पेन डाउन हड़ताल का एलान किया है। इस हड़ताल की वजह से समूचे प्रदेश में ओपीडी नहीं चल रही है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को जबरदस्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रदेश सरकार को नहीं मरीजों से कोई हमदर्दी: भाजपा

सूबे में मेडिकल ऑफिसरों की हड़ताल और सरकार की चुप्पी के बीच भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश सरकार पर हमला किया है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता डॉ. राजीव बिंदल ने वर्तमान प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के 1500 डाक्टर हड़ताल पर हैं, लाखों मरीजों का हाल खराब है लेकिन सरकार इस मसले का समाधान करने की दिशा में कोई उचित प्रयास नहीं कर रही है। 

प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख रोगी प्रतिदिन सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर उपचार कराने पहुंचते हैं। हड़ताल से गरीब और आम लोगों को अधिक दिक्कतें पेश आती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री या मंत्री को फुर्सत नहीं है कि वह डॉक्टरों से वार्ता करके समस्या का समाधान करे। 

चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता एवं घटती संख्या के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में भारी भरकम खर्च करना पड़ रहा है। कहा कि चिकित्सकों के पलायन का क्रम यदि सरकार रोकना चाहती है तो डाक्टरों के असंतोष को खत्म करना जरूरी होगा।
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