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मरीजों के लिए अच्छी खबर, डॉक्टरों ने वापस ली हड़ताल

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विधानसभा के मानसून सत्र के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और चिकित्सा अधिकारी संघ के सदस्यों के साथ एक घंटे तक चली बैठक में डॉक्टरों की अधिकतर मांगों को मानने पर सहमति बन गई है। बैठक में आश्वासन के बाद चिकित्सक संघ ने मंगलवार से प्रस्तावित हड़ताल वापस ले ली है। साथ ही डॉक्टरों ने प्रदेश हाईकोर्ट में दायर याचिका को वापस लेने का भी निर्णय लिया है।
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मुख्यमंत्री ने संघ की सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है। बैठक में मेडिकेयर सर्विसेज पर्सन एंड मेडिकेयर सर्विस संस्थान (हिंसा एवं संपत्ति को नुकसान की रोकथाम) अधिनियम 2010 में संशोधन करने और इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में लाने के प्रस्ताव पर सहमति बन गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव चर्चा के लिए मंत्रिमंडल बैठक में लाया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने रोगी कल्याण समिति, अनुबंध आधार और एडहॉक पर नियुक्त डॉक्टरों सहित सभी हिमाचल प्रदेश अस्पताल सेवा-1 चिकित्सकों को फोर टायर पे स्केल देने पर सहमति जताई। बैठक में अर्जित अवकाश के अलावा अधिकतर मामलों पर सहमति बन गई है। हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ के अध्यक्ष डा. संतलाल और महासचिव डा. जीवानंद चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल वापस ले ली है।
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हाईकोर्ट ने मांगी स्वास्थ्य सुविधाओं पर रिपोर्ट

वहीं, प्रदेश भर में डॉक्टरों की हड़ताल पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने नादौन (हमीरपुर) के एक अधिवक्ता अनूप कुमार की ओर से मुख्य न्यायाधीश के नाम भेजे ई-मेल पर संज्ञान लिया है। अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव से जानकारी तलब की कि प्रदेश भर में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है या नहीं।

अदालत ने डॉक्टरों की एसोसिएशन के बारे में जानकारी भी तलब की है। ई-मेल के जरिये अदालत के ध्यान में लाया गया कि डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान हो रहे हैं। हाई कोर्ट ने प्रधान सचिव स्वास्थ्य, निदेशक स्वास्थ्य, प्रिंसिपल आईजीएमसी और सीएमओ शिमला को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है।
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डाक्टरों की छुट्टी ने मुश्किल में डाले मरीज

डाक्टरों की एक दिन के सामूहिक अवकाश ने सोमवार को मरीजों में डाले रखा। डाक्टरों की अनुपस्थिति में प्रदेश भर के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई। पहले से दाखिल मरीजों का भी निरीक्षण नहीं हुआ। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में सोमवार को विशेषज्ञ डाक्टरों ने ओपीडी संभाली। हालांकि, काफी कम मरीज अस्पताल पहुंचे। 1500 मरीजों की ओपीडी हुई।

50 फीसदी ऑपरेशन हुए। केएनएच में ऑपरेशन भी हुए और ओपीडी भी चली। डीडीयू अस्पताल में सन्नाटा पसरा रहा। यह क्षेत्रीय अस्पताल है, यहां कोई भी डाक्टर उपस्थित नहीं था। केवल आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं। यहां हड़ताल का असर दिखाई दिया। क्षेत्रीय अस्पताल चंबा समेत पूरे जिला में सोमवार को डॉक्टरों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला।

हड़ताल की वजह से अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीज ही प्रभावित नहीं हुए बल्कि उपचाराधीन मरीजों को भी उपचार नहीं मिला। चिकित्सकों ने नियमित प्रक्रिया में वार्ड का दौरा नहीं किया। हमीरपुर में सोमवार को चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर रहे। नाहन क्षेत्रीय अस्पताल, पांवटा, ददाहू एवं सराहां सिविल अस्पतालों की ओपीडी में भी सन्नाटा पसरा रहा।

जिला अस्पताल कुल्लू में इमरजेंसी के अलावा जिला के जरी, बंजार, भुंतर, सैंज, मनाली, नग्गर सहित अन्य सभी स्वास्थ्य सामुदायिक केंद्रों में मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। सोलन में भी मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। 1200 से 1500 ओपीडी के लिए मात्र दो चिकित्सक उपलब्ध रहे। आयुर्वेदिक अस्पताल से भी चिकित्सक बुलाने पड़े। जिला बिलासपुर में डॉक्टरों की सामूहिक हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। जिला अस्पताल सहित पीएचसी और सीएचसी में भी मरीजों को इलाज नहीं मिला।
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