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एक ही बड़े अस्पताल के डॉक्टर-नर्सें एचआईवी की चपेट में, मचा हड़कंप

Thu, 18 Aug 2016 06:04 PM IST
सतीश वालिया/अमर उजाला, धर्मशाला
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बचाव ही एड्स का सुरक्षित उपचार है लेकिन आधा दर्जन से ज्यादा डॉक्टर-नर्सें खुद एचआईवी की चपेट में आ गए। इलाज करते वक्त मास्क एवं दस्ताने न पहनने से मरीजों और डॉक्टरों-नर्सों के खून का संपर्क हो गया। इससे ये खुद ही एचआईवी पॉजिटिव हो गए। अकेले कांगड़ा जिले के एक ही बड़े अस्पताल का डॉक्टर और दो नर्सें एचआईवी से संक्रमित हो गए जबकि अन्य मामले दूसरे जिलों से हैं।
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एचआईवी संक्रमित होने का पता चलते ही अब इनका पोस्ट एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस (पीईपी) के तहत इलाज किया जा रहा है। इनकी काउंसलिंग भी करवाई जा रही है। सीएमओ कांगड़ा डॉ. आरएस राणा ने इसकी पुष्टि की है। डॉ. राणा ने बताया कि अस्पतालों में मरीजों के उपचार और जांच के दौरान पूरे एहतियात बरतने के आदेश दिए गए हैं। मरीज को इंजेक्शन लगाते या ऑपरेशन करते वक्त स्टाफ और डॉक्टर पूरी सुरक्षा बरतें। बिना सुरक्षा मरीज का उपचार शुरू न करें।

कैसे बच सकते हैं डॉक्टर-नर्सें

आईजीएमसी शिमला के पूर्व प्रधानाचार्य एवं मेडिसिन विभाग के एचओडी रहे डॉ. एलएस पाल ने बताया कि डॉक्टरों और नर्सों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मरीज का खून उनके शरीर के खून के संपर्क में न आए। यह हाथ में खरोंच वगैरह से भी आ सकता है।

इसके लिए दस्ताने जरूर पहनें। एड्स रोगी की सर्जरी कर रहे हों तो दस्तानों के साथ मास्क भी पहन लें। इंजेक्शन लगाते हुए ध्यान रखा जाए कि कहीं सुई खुद को न चुभ जाए। अगर ऐसा हो तो तत्काल पीईपी से संबंधित ड्रग्स लें।

हर अस्पताल में किट उपलब्ध: दत्ता
हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन कांगड़ा यूनिट के मुख्य सलाहकार डॉ. अजय दत्ता ने कहा कि अस्पतालों में इमरजेंसी में तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। एचआईवी और इमरजेंसी में मरीज की केयर के लिए गाइडलाइन के आधार पर काम होता है। सुरक्षा के लिए हर अस्पताल में किट उपलब्ध हैं
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एक वजह यह भी

कई बार एड्स रोगी किसी दूसरी बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। वे अपनी बीमारी को छिपाते हैं और इससे बेखबर डॉक्टर-नर्सें बिना सेफ्टी इलाज शुरू कर देते हैं। बेहतर होगा कि डॉक्टर और नर्सें हर मरीज का उपचार करते समय दस्ताने जरूर पहनें और अन्य सावधानियां बरतें।

खुल गई जागरूकता अभियान की पोल
हिमाचल में एड्स पर जागरूक करने और इलाज के लिए प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महकमा करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी को राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण एसोसिएशन (नाको) से करोड़ों रुपये की मदद मिलती है। इसके तहत प्रचार

सामग्री को बांटकर और अन्य जागरूकता कार्यक्रमों से बचाव के लिए खूब प्रचार किया जाता है। गर्भ निरोधकों से लेकर कई तरह की बचाव सामग्री को बांटा जाता है। बावजूद इसके इसी महकमे के डॉक्टरों और नर्सों के एड्स की चपेट में आना इस अभियान की कमजोरी को भी दर्शाता है।
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