डॉ. लोकेंद्र के मुताबिक लगातार खड़ा होकर नौकरी करने वाले लोगों में जोड़ों के दर्द की समस्या अधिक होती है। चूंकि, इसमें हड्डियां तक टेढ़ी हो जाती हैं और समय के साथ रोग भी बढ़ता जाता है। इसलिए समय रहते उपचार करवाना जरूरी है।
हालांकि, चिकित्सक इस बीमारी में होने वाली दर्द से राहत पाने के लिए दर्द निवारक टीका लगाते हैं। घुटने का प्रत्यारोपण तक किया जाता है। समय रहते अपने खान पान और व्यायाम पर ध्यान देने से इस असहनीय दर्द से बचा जा सकता है।
जोड़ों में सूजन, लाली रहना और घुटने को मोड़ने जैसे लक्षण दिखने के बाद मरीजों को अस्पताल आना चाहिए। अगर इस समस्या को देखने के बाद भी मरीज इलाज नहीं करवाता है
तो भविष्य में उसे अधिक दर्द झेलनी पड़ सकती है। इस तरह की बीमारी लेकर उपचार करवाने आने वाले चिकित्सक इन दिनों मरीजों का मर्ज जल्द जानने के लिए एक्सरे और एमआरआई करवाने की सलाह दे रहे हैं।
चालीस की उम्र बीतने के बाद लोगों को रोजाना लगातार हल्का व्यायाम करना चाहिए। इसके अलावा ऑक्यूपेशनल थैरेपी, योग, जूते ठीक पहनना और ऊंचाई के हिसाब से वजन महिला तथा पुरुष का होना चाहिए। दूध, फलों का सेवन करना चाहिए व केमिकल युक्त चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए।
आयुर्वेदिक नुसखा
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अनुराग विजयवर्गीय का कहना है कि मरीजों को अखरोट, सूखा नारियल, अंजीर, चुकंदर, मेथी और मुनक्का का सेवन करना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों में भरपूर मात्रा में आयरन और कैलशियम होती है।
नियमित सेवन से घुटनों में चिकनाई बुढ़ापे तक रहती है। बादाम, पिस्ता, तिल, अखरोट और चारमगज से बने मिश्रण को खाने से घुटने स्वस्थ तथा सबल बने रहते है। हल्दी, सौंफ, मेथी और अश्वगंधा से बने चूर्ण को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ सेवन करना भी लाभकारी है।
गर्म पानी के दें घुटनों में सेंक
जिन व्यक्तियों को घुटनों में लगातार दर्द रहता है, वे अचानक ठंड में जाने से बचें। तिल के तेल की मालिश करें। अगर ज्यादा दर्द रहता है तो गर्म पानी के सेंक लगातार दें।