स्क्रब टायफस से बचने के लिए चिकित्सक विशेष एहतियात बरतने की सलाह देते हैं। मेडिकल कॉलेज टांडा के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विवेक सूद ने कहा कि सबसे बड़ा बचाव खेतों और घासनियों में घास लाने से पहले बाजू सहित पूरे शरीर को कपड़े से ढक लें।
बावजूद इसके अगर किसी व्यक्ति को बरसात में बुखार आए तो अस्पताल जाकर तुरंत जांच करवाएं। सूबे में स्क्रब टायफस का ज्यादा प्रकोप जुलाई से अक्तूबर महीने तक रहता है। इस मौसम में अधिकतर लोग खेतों और घासनियों में घास काटते हैं।
इस कारण पिस्सू उन्हें काट देता है, जिसे लोग हल्के में लेते हैं। स्क्रब टायफस से सूबे में अभी तक चंबा जिले के एक मरीज की मौत हो चुकी है। प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में संभावित तौर पर 2085 मरीजों के सैंपलों की जांच हुई है, जिसमें से 118 लोगों में स्क्रब टायफस पाया गया है।
पिस्सू के काटने के बाद व्यक्ति को बुखार के साथ जोड़ों में दर्द, कंपकंपी के साथ बुखार, अकड़न या शरीर का थका हुआ लगना, अधिक संक्रमण, गर्दन, बाजुओं के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां आती हैं। अगर किसी को ऐसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
ऐसे करें बचाव
बरसात के दिनों में घर के आसपास घास या झाड़ियां न उगने दें। घर के इर्द-गिर्द समय-समय पर सफाई करते रहें। खेतों में काम करते समय अपने हाथ पैरों को अच्छे से ढककर रखें। अगर 2-3 दिन से अधिक समय तक बुखार हो तो तुरंत चिकित्सक से मिलें और रक्त जांच जरूर करा लें। यह रोग एक आदमी से दूसरे को नहीं फैलता है।