अगर छोटी आयु में बच्चा बार-बार आंखे रगड़े रहते हैं। इसके अलावा बच्चे की आंखें स्टाई हो जाती है। जिससे आंखों के पर्दे में रेटिना होने शुरू होता है। ऐसे स्थिति में बच्चे की नजर पर असर पड़ता है और उसकी जो कमजोर आंख है वह टेडी अर्थात भेंगापन होना शुरू हो जाती है।
इस कारण होती है बीमारी
बच्चों में आंखों की दिक्कत छोटी आयु में होने का सबसे बड़ा कारण समय के अनुसार सभी प्रकार का टीकाकरण न होना है। जिसके कारण आठ-नौ साल तक के बच्चे में आंखों की बीमारी होने की ज्यादा दिक्कत देखने को मिलती है।
खान-पान में विशेष ध्यान न रखने के कारण भी बच्चे आंखों की बीमारी से ग्रस्त होते है। परिजनों को पढ़ाई में कमजोर हो रहे बच्चे की एक बार आंख की जांच करवनी चाहिए।
हो सकता है कि आंखे बच्चे को चश्मे की जरूरत हों, लेकिन वह बता नहीं पा रहा हो। ऐसे स्थिति में बच्चे की बार-बार आंख रगड़े पर जांच करने जरूरी है। -डॉ शैलेंद्र मन्हास, नेत्र रोग विशेषज्ञ, आई केयर सेंटर धर्मशाला अस्पताल