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Shimla News: सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी, फोटो साझा न करें

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नर्सिंग कॉलेज शुराला में आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में डीएसपी ने दिए साइबर अपराधियों से बचने के टिप्स
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फोटो मॉर्फिंग से अपराधी बदल सकते हैं आपकी तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नर्सिंग कॉलेज शुराला शिमला (भट्ठाकुफर) में शनिवार को पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अमर उजाला के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में नर्सिंग प्रशिक्षुओं को साइबर क्राइम और इंटरनेट के माध्यम से हो रही धोखाधड़ी से बचने की जानकारी दी। कार्यक्रम में 200 छात्राओं ने हिस्सा लिया।

साइबर क्राइम विभाग के डीएसपी विपिन मेहता ने बतौर मुख्य वक्ता कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी और फोटो साझा न करें। साइबर अपराधी इसका फायदा उठाकर धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं। साइबर क्राइम में इंटरनेट के माध्यम से की गई धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, डिजिटल अपराध, सोशल मीडिया हैकिंग, फिशिंग (पासवर्ड चुराना) और फोटो मॉर्फिंग (दो या अधिक तस्वीरों को एक साथ मिलाकर, एक छवि को दूसरी में बदलना) शामिल होती हैं।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से तस्वीरों को मॉर्फ किया जा रहा है, जिससे लोगों की निजता को खतरा पैदा हो रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिये व्यक्तिगत जानकारी चुराने और नकली आईडी बनाकर लोगों से धोखाधड़ी करने के मामले भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि इससे बचने के लिए अपनी गोपनीयता (प्राइवेसी) सेटिंग को मजबूत बनाएं, किसी से भी ओटीपी और पासवर्ड को साझा न करें तथा मजबूत पासवर्ड रखें। यदि किसी को साइबर अपराध का सामना करना पड़े तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर इसकी सूचना दें ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके। कार्यक्रम में हेड कांस्टेबल नीलम भारद्वाज और कांस्टेबल कमलेश ठाकुर ने भी छात्राओं को साइबर क्राइम से बचने के तरीके बताए। उन्होंने समझाया कि इंटरनेट और डिजिटल डिवाइस के माध्यम से किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को हैक किया जा सकता है। भविष्य में इलेक्ट्रिक कारों को भी हैक कर उनका दुरुपयोग करने की संभावनाएं हैं।




नर्सिंग कॉलेज की सचिव एवं पूर्व पार्षद किमी सूद ने कहा कि आजकल कई मामले सामने आ रहे हैं जहां परिवार के सदस्य या दोस्त ही इंटरनेट पर आपत्तिजनक फोटो और वीडियो डालकर ब्लैकमेल करने की कोशिश करते हैं। इससे बचने के लिए यह आवश्यक है कि अपने पासवर्ड और ओटीपी किसी से साझा न करें। उन्होंने इस जागरूकता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि अमर उजाला की यह पहल समाज में डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
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ऐसे बनाए मजबूत पासवर्ड
कार्यक्रम में वक्ताओं ने छात्राओं को सुझाव दिया कि संख्याएं, विशेष वर्ण, बड़े और छोटे अक्षरों का मिश्रण कर पासवर्ड तैयार करें। उन्होंने आगाह किया कि आधुनिक सुपर कंप्यूटर एक सेकंड में कमजोर पासवर्ड को हैक कर सकते हैं। पुलिस टीम ने www.security.org वेबसाइट का उल्लेख किया जहां उपयोगकर्ता अपने पासवर्ड की सुरक्षा जांच सकते हैं। इसके अलावा www.haveibeenpwned.com वेबसाइट के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी की ईमेल आईडी का उपयोग कहां-कहां किया है और उनकी जानकारी इंटरनेट पर बेची जा रही है या नहीं।

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