कुछ समय पहले इस विधा की खेती की शुरुआत करने वाले सुभाष पालेकर ने शिमला जिले के कुफरी में ही एक कार्यक्रम के दौरान इस खेती को जीरो बजट कहने पर सवाल उठा दिए। इसी के बाद राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इस योजना को नया नाम देने की घोषण की थी।
इसके बाद कृषि विभाग ने नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार कर विभिन्न विभागों को उनकी राय के लिए भेज दिया। सूत्रों के अनुसार विभागों के सवाल उठाने के बाद अब कृषि विभाग के अधिकारी इन आपत्तियों को दूर करने में जुट गए हैं।
शून्य लागत खेती बोले जाने से लोगों में भ्र्रम की स्थिति थी। इसलिए उसका नाम बदला जा रहा है। विभाग नाम बदलने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की अगली बैठक में ले जाएगी और वहां से मंजूरी मिलने पर योजना का नाम बदल दिया जाएगा। - ओंकार शर्मा, प्रमुख सचिव, कृषि विभाग