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पाठ्यक्रम पर विवाद, शिक्षकों ने जताई नाराजगी

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शिक्षकों ने जताई नाराजगी, विवि ने फैसला सुनाने से पहले नहीं सुना उनका तर्र्क
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क्रॉसर
शिक्षक बोले, छात्रों को पढ़ाएंगे पूरा पाठ्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विवि से संबद्ध कॉलेजों में बीकॉम तृतीय वर्ष में नए पाठ्यक्रम को पढ़ाए जाने को लेकर खड़े हुए विवाद पर विवि ने अपना फैसला सुना दिया है लेकिन कॉलेजों के वाणिज्य संकाय के शिक्षकों में अभी भी नाराजगी है। हालांकि शिक्षकों ने विवि के द्वितीय और तृतीय वर्ष में पुराने पाठ्यक्रम को और प्रथम वर्ष में नए पाठ्यक्रम को पढ़ाने के निर्णय को मान लिया है।
दरअसल कुछ कॉलेजों में द्वितीय और तृतीय वर्र्ष में नया पाठ्यक्रम पढ़ाना शुरू कर दिया था, बाद में जब पता चला तो फिर से पुराने पाठ्यक्रम में पढ़ाई शुरू की गई। शिक्षकों के मुताबिक विवि और कॉलेज दोनों स्तर पर समय रहते पाठ्यक्रम बदलाव को लेकर आपसी तालमेल और सही सूचना का संचार न हो पाना ही इस विवाद की वजह मानी जा रही है। शिक्षकों को मलाल है कि पूरे प्रदेश में बनी इस असमंजस की स्थिति पर फैसला सुनाने से पहले विवि ने उनके किसी प्रतिनिधि को नहीं बुलाया। बैठक में विवि के वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष तक को नहीं बुलाया गया।
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कॉलेजों के वरिष्ठ वाणिज्य शिक्षक डॉ. ध्रुव पाल सिंह, राजेश ढोरटा और पूनम शर्मा ने कहा कि छात्रों के हितों को देखते हुए वह तृतीय वर्ष में पुराने पाठ्यक्रम के विषय को पढ़ाने का कार्य अप्रैल से पहले पूरा कर लेंगे। विवि प्रशासन को कम से कम इस उलझन की मूल वजह को जरूर जानने का प्रयास करना चाहिए।
असमंजस विवि द्वारा 16 दिसंबर 2020 को पाठ्यक्रम में किए बदलाव पर विवि द्वारा जारी किए आदेशों से पैदा हुआ। इसमें वाणिज्य संकाय के अलावा अन्य संकाय का एक जैनरिक इलेक्टिव विषय सत्र 2020-21 के बाद लागू करने की बात कही थी। शिक्षकों का कहना है कि इसी पत्र के आधार पर कॉलेजों में तृतीय वर्ष में नए पाठ्यक्रम के तहत जैनरिक इलेक्टिव विषय पढ़ाया गया। विवि के 17 दिसंबर 2021 के आदेशों में साफ किया है कि पाठ्यक्रम में बदलाव चरणों में किया जाएगा। इसमें 2021-22 में सिर्फ प्रथम वर्ष का पाठ्यक्रम बदलेगा, 2022-23 में द्वितीय और 2023-24 में बीकॉम तृतीय वर्ष का पाठ्यक्रम बदला जाएगा।
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छात्रों को भुगतना पड़ा
गलतियों का खामियाजा
छात्र संगठनों ने पाठ्यक्रम बदलाव को लेकर खड़े हुए विवाद पर कहा कि चूक चाहे विवि स्तर पर हो या कॉलेज स्तर पर हर बार गलतियों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। एबीवीपी के प्रांत मंत्री विशाल वर्मा ने कहा कि विवि और कॉलेजों के बीच आपसी तालमेल होना बेहद जरूरी है। एसएफआई के राज्य अध्यक्ष अमित ठाकुर ने कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विवि और कॉलेजों को निर्णय लेकर उन्हें सही ढंग से लागू करवाना सुनिश्चित करना चाहिए। एनएसयूआई के राज्य उपाध्यक्ष वीनू मेहता ने कहा कि विवि और कॉलेजों की गलतियों के कारण हजारों छात्र परेशान हुए हैं।
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