चिकित्सकों ने बताई रोग के साथ जीने की कला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के पांचवें स्थापना दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मस्तिष्क के रोग मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) पर संवाद का आयोजन किया गया।
आर्ट ऑफ लिविंग विद एमएस (एमएस रोग के साथ जीने की कला) कला विषय पर किए इस आयोजन में रोग से पीड़ित पंद्रह मरीजों के साथ अस्पताल और बाहरी नामी स्वास्थ्य संस्थानों से आए न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ संवाद करवाया गया। इसमें मरीजों, चिकित्सकों और अस्पताल के स्टाफ को इस रोग के बारे में जागरूक किया गया। मरीजों ने इसमें अपनी प्रेरणादायक कहानियों को भी साझा किया। आयोजन में आईजीएमसी शिमला की प्राचार्य डॉ. सीता ठाकुर विशेष रूप से मौजूद रही।
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समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना से किया गया। इसके बाद योगोदा सोसायटी के वरिष्ठ साधु स्वामी कृष्णानंद ने जीवन को जीने की कला सीखने के तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ध्यान के वैज्ञानिक आधार को समझाया, वहीं ध्यान से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक शोधों पर चर्चा की और बताया कि कैसे वैज्ञानिक प्रयोगों के जरिये ध्यान और योग को अब मान्यता मिल रही है। सेशन में डॉ. राजेंद्र प्रसार मेडिकल कॉलेज टांडा के डॉ. अमित भारद्वाज, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के डॉ. धीरज खुराना, एआईएमएस बिलासपुर के डॉ. आशीष शर्मा, आईजीएमसी शिमला के डॉ. अंकुश (फिजियोथेरेपिस्ट), आईजीएमसी शिमला के डॉ. देवेश ने हिस्स लिया।
डॉ. नीरज शर्मा ने एमएस रोग से पीड़ित रहे मरीजों की कहानियों को बताते हुए एमएस बीमारी के साथ सामान्य जीवन जीने की कला को लेकर मरीजों के साथ संवाद किया। चमियाना अस्पताल के वरिठ चिकित्सा अधीक्षक एवं न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा ने सभी अतिथियों और मरीजों का इस स्थापना दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।