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विधानसभा में गूंजा बंदरों के आतंक का मामला, विधायकों ने रखी ये मांगे

Fri, 09 Mar 2018 09:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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प्रदेश में बंदरों के बढ़ते आतंक का मामला विधायकों ने विधानसभा सत्र में उठाया। प्रदेश में बढ़ते बंदरों के आतंक और उससे प्रभावित हो रहे किसानों-बागवानों की परेशानी बयां करने के लिए वीरवार को कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह ने सदन में प्राइवेट मेंबर्स डे पर संकल्प पेश किया। 

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चर्चा के दौरान अनिरुद्ध ने कहा कि बंदरों के आतंक के चलते बड़ी संख्या में किसानों-बागवानों ने खेती बागवानी छोड़ दी है। वहीं, आए दिन लोगों को भी बंदरों के हमलों का शिकार होना पड़ रहा है। नसबंदी की योजना भी पूरी तरह विफल रही है। 

ऐेसे में सरकार विभाग द्वारा टीमें तैयार कर बंदरों को मारने की प्रक्रिया शुरू करे। वहीं, उन्होंने बंदरों की वजह से हो रहे नुकसान का मुआवजा देने का प्रावधान करने की भी मांग की। 
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चर्चा के दौरान विधायक कर्नल इंदर सिंह ने सरकार को बंदरों की समस्या से निपटने के सुझाव दिए। कहा कि पिछली सरकार सिर्फ करोड़ों रुपये खर्च कर कागजों पर बंदरों की समस्या से निपटती रही। अब नई सरकार को चाहिए कि वह मनरेगा के तहत रखवाला रखने का प्रावधान करे। 

बंदरों को मारने के लिए टास्क फोर्स गठित की जाए

इसके अलावा सुझाव दिया कि बंदरों को खाने का सामान न डालने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। बंदरों को मारने के लिए टास्क फोर्स गठित की जाए और नसबंदी प्रक्रिया को और सुदृढ़ करने व समय समय पर इसकी जमीनी हकीकत जानने, बंदरों का निर्यात करने व न होने पर दूसरे प्रदेशों में भेजने

और फलदार पौधों का पौधारोपण करने का सुझाव दिया। वहीं, सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि बंदरों के आतंक की समस्या अब नासूर बन गई है। बीट चिह्नित कर बंदरों को मारने का काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने पिछली कांग्रेस समेत अन्य सरकारों द्वारा बंदर पकड़ने व नसबंदी में हुए खेल पर भी सवाल उठाए। कहा कि भाजपा ने राम मंदिर के लिए अभियान चलाया था, ऐसे में अब बंदरों से निपटने के लिए भी अभियान चलाए।

बंदरों से कृषि व बागवानी को इतना नुकसान

वहीं, विधायक नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि 200 करोड़ की कृषि व सौ करोड़ की बागवानी का नुकसान बंदरों के चलते हो गया है। सरकार ठोस कदम उठाए। कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार पंचायत स्तर पर होमगार्डों को तैनात करे

ताकि वह बंदरों को मार कर लोगों की समस्या को दूर करें और इससे होमगार्डों को भी काम मिल सके। वहीं उन्होंने किन्नौर में हुए ट्रायल के आधार पर सरकार से मांग की कि वह जानवरों पर चिप लगाकर उनकी निगरानी करने का प्रयास करे।

विधायक सुखराम चौधरी ने भी बंदरों का वैज्ञानिक तरीके से कलिंग करने पर ही जोर दिया। विधायक सुरेश कश्यप, राजेंद्र राणा और विक्रम जरयाल ने भी समस्या से निपटने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग रखी।

बिंदल बोले, बंदर को आस्था से न जोड़ें

चर्चा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने वक्ता को रोकते हुए कहा कि बंदर को वानर न माना जाए। कहा कि वानर वन में रहने वाले नर को कहा जाता था जिनकी मदद से भगवान राम ने रावण से युद्घ लड़ा। ऐसे में इसे आस्था से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

 रेणुका से कांग्रेस के विधायक विनय कुमार वीरवार को विधानसभा में सत्तापक्ष की ओर की सीटों के बीच एक मंत्री की सीट पर ही बैठ गए और उनसे अपने मामले निपटवाते रहे।

प्रश्नकाल के बाद जब विधानसभा में अन्य कार्यवाहियां चल रही थीं तो वे आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह की बगल में एक अन्य मंत्री की सीट के खाली होने पर बैठ गए। इस बीच सभापति की भूमिका में विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज थे। कई सदस्यों का ध्यान उस ओर खिंचा जरूर, मगर किसी ने कुछ कहा नहीं। 

महेंद्र सिंह के बाहर जाने पर अग्निहोत्री ये बोले

प्रश्नकाल के बाद मुख्यमंत्री सहित पहली पंक्ति के सभी मंत्रियों के बाहर जाने के बाद आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर भी सदन से बाहर चले तो कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने चुटकी की - कहां चले? इस पर मंत्री महेंद्र सिंह पीछे मुड़कर देखकर मुस्कराते रहे।

पहली पंक्ति के सारे नेता सदन से बाहर चले गए थे। बाहर केंद्रीय मंत्री जगतप्रकाश नड्डा नामांकन भरने आए थे। जनजातीय विकास मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि किन्नौर जिले के चूलिंग, रुशकलंग और रोपा गांव को बीएडीपी से बाहर नहीं किया गया है।

इन गांवों में योजना के तहत चल रहे कार्य पूरे होंगे। किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा कि वर्ष 2018-19 का प्लान बन रहा है। लेकिन इस प्लान में पुन: इन गांव को नहीं लिया जाएगा।

भटियात विस क्षेत्र में करोड़ों के विकास कार्य

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि गत 3 वर्षों के दौरान भटियात विधानसभा क्षेत्र में वीएमजेएस, बीएएसपी, डीसीपी व एमएमजीपीवाई के तहत 197 स्कीमों स्वीकृत हुई हैं। इसमें से 92 पर कार्य पूरे हो चुके हैं और 65 स्कीमों पर कार्य प्रगति पर है।

शेष 40 विभिन्न स्कीमों पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने और निजी भूमि के कारण इन स्कीमों पर काम शुरू नहीं हो पाया है।

सीएम ने यह जानकारी भटियात विधानसभा क्षेत्र के विधायक बिक्रम सिंह जरयाल की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के तहत क्षेत्र के लिए 5 करोड़ 49 लाख 73 हजार की राशि स्वीकृत हुए हैं। इसमें से 2 करोड़ 79 लाख 28 हजार की राशि के कार्य पूरे कर लिए हैं जबकि 2 करोड़ 70 लाख 45 हजार की राशि के कार्य प्रगति पर है।
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रोहडू़ में लगेंगे 30 नए ट्रांसफार्मर

ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि गत 3 सालों में रोहडू़ विधानसभा क्षेत्र में 48 नए ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। इसके अलावा 30 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं। सरकार ने इसके लिए 31 मार्च, 2019 तक का समय निर्धारित किया है।

मंत्री शर्मा ने यह बात विधायक मोहन लाल ब्राक्टा की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कही। बीते 3 सालों में रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र में पुराने लकड़ी के खंभों के स्थान पर 4,253 नए लोहे के खंभे लाए गए हैं। इन पर तार भी लगा दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि नोगली से एकमात्र सप्लाई होने के कारण बिजली की आपूर्ति बाधित होती है। केएफडब्ल्यू स्कीम के तहत कोटखाई से गंगटोली तक दूसरी वितरण बिजली लाइन का कार्य प्रस्तावित है।

इस कार्य को अवार्ड भी कर दिया गया है। 2020 तक पूर्ण होने की संभावना है, इससे क्षेत्र में बिजली की सप्लाई सुचारु हो सकेगी। उन्होंने कहा कि 22 केवी नियंत्रण बिंदु कांसाकोटी का कार्य 3 फरवरी, 2018 को आवंटित कर दिया गया है।

इस कार्य को 31 मार्च 2020 तक पूर्ण होने की संभावना है। विधायक अनिरुद्ध सिंह के एक अन्य सवाल के जवाब में ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि विद्युत मंडल राजगढ़ के तहत कसुम्पटी निर्वाचन क्षेत्र में पड़ने वाले गांव पीरन, सतलाई एवं बलोग को विद्युत उप-मंडल जुन्गा में हस्तांतरित करने के आदेश हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड सीमित ने जारी कर दिए हैं।
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