साहित्यकार सादिया देलवी ने भी विवाद से शुरुआत की। उन्होंने कहा कि खुशवंत सिंह के लिए देश सीमाओं में विभाजित नहीं था। उन्हें पाकिस्तान से भी लगाव था। वे मुस्लिम धर्म के काफी करीब थे।
उन्हें याद है जब वह अंतिम दिनों में उनसे मिलीं थी तो उन्होंने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के तत्कालीन चेयरमैन सैयद शहाबुद्दीन से मुलाकात की इच्छा जताई थी। वह शहाबुद्दीन को एक चेक भेंट करना चाहते थे, ताकि मस्जिद का पुनर्निर्माण जल्द शुरू हो।
उन्होंने बताया कि जब उन्हें मामला न्यायालय में लंबित होने का हवाला दिया तो उन्होंने कहा कि इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता है। साजिया ने कहा कि उन्हें मालूम था कि इस बात पर विश्वास करना आसान नहीं होगा। इसलिए उनकी बातों का रिकॉर्ड आज भी संभाल कर रखा है।
खुशवंत सिंह संत या पापी विषय पर महिला साहित्यकारों ने विचार रखे। सादिया देलवी ने कहा कि वह खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी थे। तवलीन ने कहा कि खुशवंत सिंह ने स्वर्ण मंदिर पर भिंडरावाले का विरोध किया था। इसके बाद उन्हें धमकियां मिलीं और भारत सरकार को उन्हें सुरक्षा देनी पड़ी थी।
लिटफेस्ट में आज गूंजेगा अनुच्छेद 370
लिटफेस्ट में शनिवार को दूसरे दिन पहले सत्र में फिल्मीस्तान में 60 साल विषय पर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर व शांतनु राय चौधरी भारतीय सिनेमा पर चर्चा करेंगे। अनुच्छेद 370 व अन्य बदलाव पर कश्मीर पास्ट इंपरफेक्ट फ्यूचर टेंस पर साहित्यकार राधा कुमार, तवलीन सिंह, तुहिन सिन्हा व जनरल अताहसनैन चर्चा करेंगे।