कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण को भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई ने पैसे का आवंटन तो कर दिया, लेकिन अधिगृहित जमीन पर न एनएचएआई का कब्जा हुआ और न ही केंद्र सरकार उसकी मालिक बन पाई है। हालांकि, इसके लिए भू-मालिक को 37.41 लाख की राशि आवंटित की जा चुकी है। इससे फोरलेन के लिए जमीन अधिग्रहण करने वाली इकाई पर सवाल उठ रहे हैं। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में मौजा बकरोआ के खसरा नंबर 259/115/17 की मार्च 2013 में अनुपूरक 3 ए की अधिसूचना जारी कर दी।
11 मार्च 2014 में थ्रीडी की अधिसूचना जारी हो गई। उसके बाद 21 अक्तूबर, 2014 को भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई मुख्यालय बिलासपुर ने अवार्ड नंबर 2/2014-15 (बीपीआर) मौजा बकरोआ घोषित कर दिया। 22 जनवरी 2015 को भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई ने भू मालिक को उपरोक्त राशि आवंटित कर दी। हैरानी की बात है कि उसके बाद मौजा बकरोआ के उन सभी खसरा नंबरों का इंतकाल केंद्र के नाम दर्ज और तस्दीक हो गया, लेकिन उपरोक्त खसरा नंबर जिसका उक्त इकाई ने अनुपूरक अवार्ड घोषित किया था, उसका इंतकाल जानबूझकर केंद्र सरकार के नाम दर्ज व तस्दीक करने से छोड़ दिया।
फोरलेन प्रभावित एवं विस्थापित समिति ने उक्त खसरा नंबर के इंतकाल संबंधी जानकारी आरटीआई में मांगी है, लेकिन इकाई की तरफ से कोई भी जानकारी मुहैया नहीं करवाई जा रही है। दूसरी ओर उक्त इकाई के भू अर्जन अधिकारी अपने कार्यालय के पत्र संख्या एलएओ/ (विभूअई)/राउमा/2019-592 में 22 अगस्त को आरटीआई में समिति को जानकारी उपलब्ध करवाई है कि जो भूमि अधिगृहित की गई है, उसके इंतकाल भारत सरकार के नाम दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि उक्त खसरा नंबर पर प्रभावित व्यक्ति अपना बिजनेस कर रहा है।
इससे साफ है कि भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई इसे सीधे लाभ पहुंचा रही है। समिति ने उपायुक्त जिला बिलासपुर से उपरोक्त विषय पर निजी दखल देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
एनएचएआई ने उक्त खसरा नंबर की रजिस्ट्री सीधे अपने नाम बनवाई है। इसमें भू-अधिग्रहण की विशेष इकाई का कोई संबंध नहीं है। इसके लिए जो भी कार्रवाई होगी वो एनएचएआई ही करेगी।
- अजीत कुमार, तहसीलदार भू अधिग्रहण इकाई फोरलेन