छात्र अभिभावक मंच ने निजी स्कूलों की मनमानी और सरकार के केवल ट्यूशन फीस लेने के आदेश की अवहेलना के खिलाफ शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा प्रमोद चौहान को ज्ञापन भी सौंपा। सरकार के केवल ट्यूशन फीस वसूली के आदेश लागू करने के साथ अन्य सभी तरह के चार्जिस पर रोक लगाने की मांग की। कहा कि सभी स्कूल अपनी फीस बुकलेट जारी करें।
सभी स्कूलों की मदवार फीस का ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। मंच ने चेतावनी दी कि वर्ष 2019 की तर्ज पर केवल ट्यूशन फीस लेने के निर्णय को अगर अक्षरश: लागू न किया गया। ट्यूशन फीस तिमाही के बजाय हर महीने के आधार पर न वसूली गई और सभी चार्जिस माफ व समाहित न किए गए तो शिक्षा निदेशालय के बाहर चौबीस घंटे का महा पड़ाव होगा और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन में विजेंद्र मेहरा, विवेक कश्यप, फालमा चौहान, बलबीर पराशर, सत्यवान पुंडीर, जयानंद, बाबू राम, कपिल शर्मा, बालकराम, अनिल, संगीत, शुभम, जय चंद, राकेश रॉकी, कृष्णा, मीनाक्षी, रेखा, भावना, विनोद, विनीत, सुरेश, सरोज, सपना, लायक राम, रिशु, राकेश, विक्की, पवना, कविता, बिमला, शकुंतला, सीमा और अनिता सहित कई अन्य शामिल हुए।
मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, सदस्य विवेक कश्यप व फालमा चौहान ने कहा कि कोरोना काल में भी निजी स्कूल खुली लूट कर रहे हैं। विभाग ने जिन सात निजी स्कूलों का निरीक्षण किया है, उन्होंने शिक्षा विभाग के पास गलत रिकॉर्ड पेश किया है। इन पर सख्त कार्रवाई की जाए। शिमला शहर के बाकी निजी स्कूलों की भी इंस्पेक्शन की जाए।
निजी स्कूलों के लगभग 70 प्रतिशत अभिभावक निजी स्कूलों के बार-बार भेजे गए मोबाइल संदेशों के दबाव में एनुअल चार्ज, एडमिशन फीस, कंप्यूटर फीस, स्मार्ट क्लास रूम चार्ज, स्पोर्ट्स चार्ज, केयर्स फंड, मिसलेनियस फंड व अन्य फंड व फीस कैबिनेट का निर्णय आने से पूर्व ही जमा कर चुके हैं। जमा फीस में ट्यूशन फीस भी 2020 में आठ से बीस प्रतिशत तक बढ़ाई गई फीस के आधार पर ली गई है। निजी स्कूल प्रबंधन ज्यादा वसूली फीस को अगली किस्तों में समाहित करने में आनाकानी कर रहे हैं और न ही बढ़ी हुई फीस को लौटा रहे हैं।