प्रदेश आयुर्वेद विभाग ने हिमाचल में हर महीने होने वाली आयुर्वेदिक चिकित्सकों की बैठकों पर रोक लगा दी है। निदेशालय ने इस बारे में सभी जिला आयुर्वेदिक अधिकारियों को लिखित आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश में हवाला दिया गया है कि डाक्टरों के बैठकों में जाने से जहां ओपीडी प्रभावित होती है, वहीं उपचार के लिए आए मरीजों को भी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
यही नहीं, बैठकों में आने वाले डाक्टरों को टीए-डीए के भुगतान से सरकारी खजाने को भी चपत लगती है। प्रदेश आयुर्वेदिक विभाग में सैकड़ों चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। मासिक बैठकों में भाग लेने से कई स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लगाने पड़ते थे। इससे ओपीडी सेवाएं प्रभावित होती थीं।
पिछले लंबे समय से इस तरह की बैठकों से कोई संतोषजनक परिणाम सामने नहीं आए हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए निदेशालय ने इस बारे में सभी जिला आयुर्वेदिक अधिकारियों को लिखित आदेश जारी कर दिए हैं। जिला आयुर्वेदिक अधिकारियों को भेजे पत्र में मासिक बैठकों को तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं।
आयुर्वेदिक चिकित्सकों की मासिक बैठकें तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं। इस तरह की बैठकों से ओपीडी सेवाएं प्रभावित होती हैं, जिससे मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है। -डॉ. संजीव भटनागर, निदेशक, प्रदेश आयुर्वेदिक विभाग