10.3 बीघा भूमि में बना यह तीन मंजिला हेलीपोर्ट सीसीटीवी कैमरों से लैस है और इसमें यात्रियों के लिए आधुनिक वेटिंग रूम के अलावा 50 वाहनों की पार्किंग भी बनाई गई है। हेलीपोर्ट से उड़ाने शुरू न होने के कारण शिमला के पर्यटन कारोबारी खासे मायूस हैं।
राजधानी के बहु प्रतीक्षित संजौली हेलीपोर्ट पर 18 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की अनुमति नहीं मिल पाई है। पर्यटन विभाग ने इस साल की शुरूआत में 12 जनवरी को मुख्यमंत्री के हाथों इस हेलीपोर्ट का उद्घाटन करवाया था। करीब ढाई महीने बाद भी डीजीसीए की मंजूरी न मिलने के कारण हेलीपोर्ट से उड़ाने शुरू नहीं हो पाई हैं।
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केंद्र सरकार के स्वदेश दर्शन कार्यक्रम में हिमालयन सर्किट के अंतर्गत 12.13 करोड़ और केंद्र सरकार की उड़ान-2 योजना में 6 करोड़ की लागत से ढली संजौली बाईपास पर शिमला का पहला सरकारी हेलीपोर्ट तैयार किया गया है। यह हेलीपोर्ट शिमला के लिए न सिर्फ टूरिस्ट कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है बल्कि प्रदेश के सबसे बड़े आईजीएमसी अस्पताल के नजदीक होने के चलते आपातकालीन सेवाओं के लिए भी कारगर साबित हो सकता है।
10.3 बीघा भूमि में बना यह तीन मंजिला हेलीपोर्ट सीसीटीवी कैमरों से लैस है और इसमें यात्रियों के लिए आधुनिक वेटिंग रूम के अलावा 50 वाहनों की पार्किंग भी बनाई गई है। हेलीपोर्ट से उड़ाने शुरू न होने के कारण शिमला के पर्यटन कारोबारी खासे मायूस हैं। समर टूरिस्ट सीजन के दौरान अगर इस हेलीपोर्ट से उड़ाने शुरू हो जाएं तो हेलीकाप्टर के जरिये हाई एंड टूरिस्ट के शिमला आने से पर्यटन कारोबार में तेजी आ सकती है।
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डीजीसीए से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद
संजौली हेलीपोर्ट से उड़ाने शुरू करने के लिए डीजीसीए से अनुमति मांगी गई है। इसी महीने निजी तौर पर भी डीजीसीए कार्यालय में जा कर मंजूरी देने का आग्रह किया है। उम्मीद है डीजीसीए की टीम जल्द ही हेलीपोर्ट का निरीक्षण करने के बाद अनुमति दे देगी। - अमित कश्यप, निदेशक, पर्यटन विभाग